मावली मेला बना सहारा: दिव्यांगजनों को मिला नया संबल

विशेष शिविर में 97 लाभान्वित, ट्रायसायकल–व्हीलचेयर से लेकर कृत्रिम अंग तक वितरित
नारायणपुर। मावली मेला 2026 के अवसर पर जिले के दिव्यांगजनों के लिए आयोजित विशेष शिविर ने अनेक जरूरतमंदों की जिंदगी में राहत और आत्मनिर्भरता की नई उम्मीद जगाई। इन्डोर स्टेडियम, माहका में 14 से 16 फरवरी तक चले इस शिविर के तीसरे दिन कुल 97 दिव्यांगजनों का पंजीयन कर उन्हें सहायक उपकरण और कृत्रिम अंग उपलब्ध कराए गए। शिविर के माध्यम से दिव्यांगजनों को न केवल साधन मिले, बल्कि उन्हें सम्मानजनक जीवन की ओर एक मजबूत सहारा भी मिला।

शिविर में चार दिव्यांगजनों को ट्रायसायकल, 15 को व्हीलचेयर, छह को एक-एक जोड़ी बैसाखी और एक दृष्टिबाधित दिव्यांग को दो श्वेत छड़ी प्रदान की गईं। इसके अतिरिक्त चार दिव्यांगजनों को कृत्रिम हाथ, चार को कृत्रिम पैर, नौ को कैलिपर्स तथा 11 हितग्राहियों को वृद्धछड़ी और जूता बनवाकर लाभान्वित किया गया। जरूरत के अनुसार उपकरणों के मापन और फिटिंग की प्रक्रिया मौके पर ही पूरी की गई, जिससे लाभार्थियों को शीघ्र उपयोग में सुविधा मिले।

दिव्यांगता प्रमाण पत्र के लिए चिन्हांकन
शिविर में 22 दिव्यांगजनों का दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी करने हेतु चिन्हांकन किया गया। इन लाभार्थियों को आवश्यक चिकित्सकीय जांच और परीक्षण के लिए जिला चिकित्सालय नारायणपुर में उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि उन्हें शासकीय योजनाओं का लाभ समय पर मिल सके।
प्रशासन–स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त पहल
शिविर में अपर कलेक्टर, उप संचालक समाज कल्याण, स्वास्थ्य विभाग के हड्डी रोग विशेषज्ञ सहित समाज कल्याण एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने लाभार्थियों से संवाद कर उनकी आवश्यकताओं की जानकारी ली और आश्वस्त किया कि दिव्यांगजनों के लिए योजनाओं का लाभ निरंतर पहुंचाया जाएगा।
सम्मान और आत्मनिर्भरता की ओर कदम
प्रशासन का कहना है कि ऐसे शिविरों का उद्देश्य केवल उपकरण वितरण नहीं, बल्कि दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाकर मुख्यधारा से जोड़ना है। मावली मेला जैसे बड़े आयोजनों के साथ इस तरह की सामाजिक पहल जोड़ना जिले में समावेशी विकास की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।




