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माओवादी संगठन को बड़ा झटका: चार शीर्ष अंडरग्राउंड नेताओं ने छोड़ा हथियारों का रास्ता

44–46 साल तक भूमिगत रहे पोलित ब्यूरो व केंद्रीय समिति के सदस्यों की मुख्यधारा में वापसी

तेलंगाना पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण, पुनर्वास नीति के तहत 90 लाख की सहायता

हैदराबाद/तेलंगाना, 24 फरवरी। प्रतिबंधित माओवादी संगठन सीपीआई (माओवादी) को एक ऐतिहासिक और रणनीतिक झटका लगा है। संगठन के चार बेहद वरिष्ठ अंडरग्राउंड नेताओं ने दशकों तक हिंसक रास्ते पर चलने के बाद हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया है। तेलंगाना पुलिस महानिदेशक की मौजूदगी में इन नेताओं ने आत्मसमर्पण कर सरकार की पुनर्वास नीति के तहत समाज की मुख्यधारा में लौटने की घोषणा की।

आत्मसमर्पण करने वालों में पोलित ब्यूरो सदस्य तिप्पिरी तिरुपति उर्फ देवुजी उर्फ कुम्मा दादा (44 वर्षों तक भूमिगत), केंद्रीय समिति सदस्य मल्ला राजी रेड्डी उर्फ संग्राम (46 वर्षों तक भूमिगत), तेलंगाना राज्य समिति सचिव बडे चोक्का राव उर्फ दामोदर उर्फ जगन (28 वर्षों तक भूमिगत) और राज्य समिति सदस्य नुने नरसिम्हा रेड्डी उर्फ गंगन्ना उर्फ सन्नु दादा (36 वर्षों तक भूमिगत) शामिल हैं।

शीर्ष नेतृत्व के लौटने से संगठनात्मक ढांचा कमजोर

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, संगठन के पोलित ब्यूरो और केंद्रीय समिति स्तर के नेताओं की वापसी से सीपीआई (माओवादी) के शीर्ष नेतृत्व ढांचे को गहरा आघात पहुंचा है। तेलंगाना राज्य समिति के सचिव सहित प्रमुख रणनीतिक भूमिकाओं में रहे इन नेताओं के मुख्यधारा में लौटने से संगठन के नेटवर्क, लॉजिस्टिक्स और संचालन क्षमता पर सीधा असर पड़ेगा।

पुनर्वास नीति के तहत 90 लाख की सहायता

तेलंगाना सरकार की पुनर्वास नीति के अंतर्गत आत्मसमर्पण करने वाले इन चारों नेताओं को कुल 90 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की गई है। तिप्पिरी तिरुपति उर्फ देवुजी और मल्ला राजी रेड्डी उर्फ संग्राम पर 25–25 लाख रुपये का इनाम घोषित था, जबकि बडे चोक्का राव उर्फ दामोदर और नुने नरसिम्हा रेड्डी उर्फ गंगन्ना पर 20–20 लाख रुपये का इनाम था। पुलिस ने बताया कि राहत एवं पुनर्वास पैकेज के तहत सभी देय लाभ तत्काल उपलब्ध कराए जा रहे हैं, ताकि वे सम्मानजनक जीवन की नई शुरुआत कर सकें।

लगातार कमजोर पड़ रहा माओवादी नेटवर्क

आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2025–26 में बड़ी संख्या में माओवादी कैडरों ने हथियार छोड़कर आत्मसमर्पण किया है। बीते दो वर्षों में सैकड़ों भूमिगत कैडरों की वापसी से संगठन का आधार तेजी से सिमट रहा है। सुरक्षा बलों की सतत कार्रवाइयों, नेटवर्क पर प्रहार, आपसी मतभेद और वैचारिक मोहभंग ने संगठन को भीतर से कमजोर किया है।

हिंसा छोड़ विकास की राह पर लौटने की अपील

तेलंगाना पुलिस महानिदेशक ने शेष भूमिगत कैडरों से हिंसा का रास्ता छोड़कर अपने गांव–समाज में लौटने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार की व्यापक पुनर्वास एवं पुनर्समावेशन नीति के तहत लौटने वालों को सुरक्षा, संरक्षण, आर्थिक सहायता और पुनर्वास के सभी अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि शीर्ष स्तर के नेताओं का आत्मसमर्पण केवल सुरक्षा सफलता नहीं, बल्कि वैचारिक बदलाव का संकेत भी है। यह घटना उन युवाओं के लिए संदेश है जो भटकाव में हथियार उठा लेते हैं—कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में लौटकर सम्मानजनक जीवन की राह हमेशा खुली है।

दशकों तक हिंसा के रास्ते पर रहे नेताओं की मुख्यधारा में वापसी को तेलंगाना पुलिस और सरकार की समन्वित रणनीति की बड़ी सफलता माना जा रहा है। यह घटनाक्रम माओवादी संगठन के लिए संगठनात्मक संकट का संकेत है, वहीं प्रभावित क्षेत्रों में शांति और विकास की उम्मीदों को नया बल देता है।

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