नारायणपुर

नक्सल दहशत में उजड़ा गारपा का शासकीय उद्यान, अब ग्रामीणों ने उठाई पुनर्जीवन की मांग

अबूझमाड़ में शांति की आहट, फिर से हरियाली की उम्मीद

कैलाश सोनी-नारायणपुर। अबूझमाड़… वह इलाका, जिसका नाम वर्षों तक नक्सलवाद की वजह से डर और सन्नाटे का पर्याय बन गया था। जहां कभी बंदूक की आवाजें गूंजती थीं, आज वहां धीरे-धीरे शांति की आहट सुनाई देने लगी है। बदले हालातों के बीच अब यहां के ग्रामीण अपने उजड़े भविष्य को फिर से संवारने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। इसी उम्मीद की एक बड़ी तस्वीर है-गारपा का शासकीय उद्यान। वर्षों पहले नक्सल हिंसा और प्रशासनिक उपेक्षा के चलते उजड़ चुका यह उद्यान अब ग्रामीणों की सामूहिक मांग पर फिर से जिंदा किए जाने की राह देख रहा है।

कभी इस उद्यान में कटहल, लीची, आम, जामुन, चीकू, नींबू, अमरूद, पपीता, केला और अन्य फलदार पेड़ पौधों की हरियाली थी। आसपास के गांवों के लोग यहीं से रोजगार और रोजमर्रा की जरूरतों का सहारा पाते थे। महिलाएं आसपास के बाजारों में फल बेचकर घर का खर्च चलाती थीं, युवा उद्यान में काम कर अपने परिवार का पेट पालते थे। बच्चे इस हरियाली के बीच खेलते-बढ़ते थे। लेकिन नक्सल हिंसा के दौर में यह सब थम गया। धीरे-धीरे उद्यान वीरान होता गया और आज वहां सिर्फ सूखे पत्ते, टूटे रास्ते और खामोशी बची है।

डर के साये में उजड़ता गया उद्यान

स्थानीय ग्रामीण बताते हैं कि एक समय ऐसा आया जब गारपा उद्यान तक पहुंचना भी खतरे से खाली नहीं था। सुरक्षा के नाम पर आवाजाही सीमित कर दी गई। विभागीय अमला भी लंबे समय तक यहां नहीं पहुंच पाया। रखरखाव बंद हुआ तो पौधे सूखने लगे। धीरे-धीरे हरियाली उजड़ती चली गई और गारपा उद्यान नक्सल दहशत की एक और चुप्पी भरी कहानी बन गया।

बदलते हालात, लौटता भरोसा

पिछले कुछ वर्षों में हालात बदले हैं। सुरक्षा बलों की लगातार मौजूदगी, सड़कों का निर्माण और सरकारी योजनाओं की पहुंच से अबूझमाड़ में धीरे-धीरे भरोसा लौट रहा है। गांवों में स्वास्थ्य शिविर लग रहे हैं, राशन की व्यवस्था सुधरी है और बच्चे स्कूल तक पहुंचने लगे हैं। सबसे अहम बात यह है कि ग्रामीणों के मन से डर का साया कुछ हद तक छंटा है। यही वजह है कि अब गारपा उद्यान को फिर से संवारने की मांग जोर पकड़ रही है।

पहले भी दी थी गुहार, अब फिर उम्मीद

ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने पहले भी उद्यान को फिर से शुरू कराने के लिए प्रशासन से गुहार लगाई थी, लेकिन उस वक्त हालात अनुकूल नहीं थे। अब जब शांति की स्थिति बन रही है, तो लोग चाहते हैं कि सरकार इस मौके को विकास के लिए इस्तेमाल करे। ग्राम सभाओं में गारपा उद्यान का मुद्दा बार-बार उठ रहा है। ग्रामीण प्रतिनिधि चाहते हैं कि उद्यान को पुनर्जीवित कर स्थानीय लोगों को ही रोजगार दिया जाए।

रोजगार की आस, पलायन पर लग सकती है रोक

गारपा उद्यान के पुनर्जीवन से स्थानीय युवाओं को काम मिलने की उम्मीद है। उद्यानिकी, पौधरोपण, फलोत्पादन और वनोपज के जरिए रोजगार के नए अवसर बन सकते हैं। महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों को भी इससे जोड़ा जा सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर गांव में ही काम मिलेगा तो युवाओं को बाहर मजदूरी करने नहीं जाना पड़ेगा। इससे पलायन पर रोक लगेगी और गांव की आर्थिक हालत सुधरेगी।

पड़ताल में दिखी बदहाली

हमारी टीम ने मौके पर पहुंचकर देखा कि उद्यान क्षेत्र में कई जगह झाड़ियां उग आई हैं, पुराने पौधरोपण क्षेत्र सूख चुके हैं और पगडंडियां जर्जर हालत में हैं। कहीं-कहीं अव्यवस्थित कटाई के निशान भी नजर आए। हालांकि, यह भी साफ दिखा कि यदि यहां योजनाबद्ध तरीके से काम किया जाए तो कुछ ही समय में हरियाली लौट सकती है। जमीन उपजाऊ है और जल स्रोत भी पास ही हैं।

प्रशासनिक हलचल की सुगबुगाहट

सूत्रों के मुताबिक वन विभाग और उद्यानिकी विभाग स्तर पर गारपा उद्यान को लेकर प्रारंभिक चर्चा शुरू हुई है। क्षेत्र का आकलन कर रिपोर्ट तैयार करने की बात कही जा रही है। यदि बजट और मंजूरी मिलती है तो पौधरोपण, बाड़बंदी, सिंचाई व्यवस्था और सुरक्षा के इंतजाम किए जा सकते हैं। स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षण देकर उद्यान से जोड़े जाने की योजना पर भी विचार हो रहा है।

ग्रामीण बोले—हरियाली लौटेगी तो जिंदगी लौटेगी

गारपा और आसपास के गांवों के लोगों का कहना है कि उन्होंने लंबे समय तक हिंसा और डर का दौर झेला है। अब वे अपने बच्चों के लिए सुरक्षित और बेहतर भविष्य चाहते हैं। ग्रामीणों की मांग है कि गारपा शासकीय उद्यान को पुनर्जीवित किया जाए, ताकि यह इलाका फिर से हरियाली और खुशहाली की पहचान बने। उनका कहना है- “जब जंगल हरे होंगे, तभी हमारी जिंदगी भी हरी होगी।”

अब देखना यह है कि शांति की इस आहट को प्रशासन विकास की ठोस जमीन पर उतार पाता है या नहीं। अगर गारपा उद्यान फिर से गुलजार हुआ, तो यह अबूझमाड़ के लिए सिर्फ एक उद्यान नहीं, बल्कि नए भरोसे और नई शुरुआत का प्रतीक होगा।

अबूझमाड़ लाइव न्यूज़

अबूझमाड़ लाइव न्यूज़ पक्ष पर विपक्ष पर हर एक पक्ष पर निष्पक्ष बेबाक एवं धारदार पत्रकारिता के लिए संकल्पित है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

You cannot copy content of this page