दिल्ली दूर नहीं… अब अबूझमाड़ के सपनों को मिले पंख

नक्सल छाया से निकल राष्ट्रीय उड़ान को तैयार युवा, कलेक्टर नम्रता जैन की पहल से बदली आकांक्षाओं की दिशा
फाइटर पायलट विवेक साहू का गरांजी विद्यालय में प्रेरक संवाद, 21 फरवरी को जगदलपुर एयरपोर्ट भ्रमण
कैलाश सोनी, नारायणपुर। “दिल्ली दूर नहीं”—कभी यह कहावत अबूझमाड़ के युवाओं के लिए महज एक सपना भर थी। घने जंगलों, दुर्गम रास्तों और सीमित अवसरों के बीच पले-बढ़े आदिवासी अंचल के बच्चों के लिए देश की मुख्यधारा तक पहुंचना दूर की कौड़ी लगता था। लेकिन अब तस्वीर बदल रही है। नारायणपुर जिले में कलेक्टर नम्रता जैन की दूरदर्शी पहल ने अबूझमाड़ के युवाओं के भीतर नई ऊर्जा, नए सपने और राष्ट्रीय स्तर की उड़ान भरने का आत्मविश्वास भर दिया है। शिक्षा को प्रेरणा, अनुभव को दिशा और अवसर को लक्ष्य से जोड़ने की इस मुहिम ने यह साबित कर दिया है कि यदि सही मार्गदर्शन मिले, तो अबूझमाड़ के बच्चे भी देश की ऊंचाइयों को छू सकते हैं।

गरांजी विद्यालय में हौसलों की उड़ान
नारायणपुर के शासकीय बालक बुनियादी 500 सीटर आवासीय विद्यालय, गरांजी में आयोजित प्रेरक सत्र ने आदिवासी अंचल के विद्यार्थियों के लिए नई खिड़की खोल दी। महासमुंद के जांबाज फाइटर पायलट विवेक साहू जब विद्यालय पहुंचे, तो पूरा परिसर उत्साह और जिज्ञासा से सराबोर हो उठा। बच्चों ने पहली बार किसी फाइटर पायलट को इतने करीब से देखा—वह भी अपने ही राज्य का, अपनी ही मिट्टी से निकला हुआ। कलेक्टर नम्रता जैन के विशेष आग्रह पर आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को रक्षा सेवाओं और विमानन क्षेत्र में करियर के प्रति प्रेरित करना था। यह पहल केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि अबूझमाड़ के बच्चों के भीतर छुपी संभावनाओं को पहचानने की प्रशासनिक संवेदनशीलता का परिचायक बनी।
लक्ष्य तय करो, उड़ान खुद बन जाएगी
कार्यक्रम के दौरान विवेक साहू ने अपने संघर्षपूर्ण सफर को बच्चों के साथ साझा किया। उन्होंने बताया कि ग्रेजुएशन के बाद कैसे कठिन परीक्षाओं, कोचिंग और अनुशासित जीवनशैली के दौर से गुजरकर उन्होंने भारतीय वायुसेना में स्थान पाया। उनका संदेश सीधा और असरदार था—“सफलता की पहली सीढ़ी है लक्ष्य का निर्धारण। शिक्षा के साथ यदि मन में स्पष्ट लक्ष्य हो और मेहनत निरंतर जारी रहे, तो आसमान की दूरियां भी कम पड़ जाती हैं।”
उनकी बातें सुनते हुए बच्चों की आंखों में चमक थी—एक नई संभावना की चमक। जिन बच्चों ने अब तक हवाई जहाज केवल किताबों या दूर आसमान में उड़ते देखा था, उनके सामने आज वह व्यक्ति खड़ा था, जो रोज़ कॉकपिट में बैठकर आकाश को चीरता है।
कॉकपिट से कश्मीर तक: अनुभवों ने जगाए सपने
विद्यार्थियों के सवालों ने संवाद को और जीवंत बना दिया। जब किसी छात्र ने पूछा कि फाइटर जेट उड़ाते समय कैसा लगता है, तो विवेक साहू ने मुस्कुराते हुए अंबाला, जयपुर, गोवा, कोलकाता, बेंगलुरु, जम्मू-कश्मीर और मुंबई के अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि किस तरह कठिन मौसम, ऊंचाई और रणनीतिक जिम्मेदारियों के बीच एक पायलट को संयम और साहस बनाए रखना होता है।
इन किस्सों ने बच्चों के मन में पायलट बनने की आकांक्षा को और प्रखर कर दिया। अबूझमाड़ के दुर्गम अंचल में बैठकर देश की सीमाओं की सुरक्षा की कहानियां सुनना, बच्चों के लिए किसी प्रेरक फिल्मी दृश्य से कम नहीं था।
रनवे पर उतरेंगे सपने
कार्यक्रम के दौरान जब विद्यार्थियों ने हवाई जहाज को नजदीक से देखने की इच्छा जताई, तो कलेक्टर नम्रता जैन ने संवेदनशीलता दिखाते हुए तत्काल पहल की। उनके निर्देश पर 21 फरवरी 2026 को गरांजी आवासीय विद्यालय और नवोदय विद्यालय सुपगांव के विद्यार्थियों को नारायणपुर से जगदलपुर हवाई अड्डे का शैक्षणिक भ्रमण कराया जाएगा।
यह भ्रमण सिर्फ एक यात्रा नहीं, बल्कि बच्चों के सपनों को जमीन पर उतरने का अवसर है—रनवे पर खड़े होकर विमान को देखना, भीतर प्रवेश कर उसकी कार्यप्रणाली समझना और पायलट की दुनिया को महसूस करना। प्रशासन का मानना है कि अनुभव आधारित शिक्षा बच्चों की सोच को व्यापक बनाती है और आत्मविश्वास को नई ऊंचाई देती है।
अबूझमाड़ के लिए नई सोच, नई दिशा
अबूझमाड़ लंबे समय तक दुर्गमता और नक्सल प्रभावित छवि के कारण विकास की मुख्यधारा से दूर रहा। लेकिन आज शिक्षा, संपर्क और संवेदनशील प्रशासनिक पहलों के जरिए यहां के बच्चों को अवसरों से जोड़ा जा रहा है। कलेक्टर नम्रता जैन की रणनीति स्पष्ट है—केवल स्कूल खोल देना पर्याप्त नहीं, बच्चों को रोल मॉडल से जोड़ना, करियर के नए विकल्प दिखाना और राष्ट्रीय मंच से परिचय कराना जरूरी है।
प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि जब बच्चे अपने जैसे परिवेश से निकले सफल व्यक्तित्वों से मिलते हैं, तो उनमें “मैं भी कर सकता हूं” का विश्वास जन्म लेता है। यही विश्वास भविष्य की नींव है।
शिक्षा से आकांक्षा तक: प्रशासन की संवेदनशील पहल
इस विशेष सत्र में जिला शिक्षा अधिकारी अशोक कुमार पटेल, डीएमसी दीनबंधु रावटे और विद्यालय के शिक्षकगण की उपस्थिति ने कार्यक्रम को और प्रभावी बनाया। शिक्षकों ने माना कि इस तरह के प्रेरक संवाद बच्चों की पढ़ाई में रुचि बढ़ाते हैं और उन्हें लक्ष्य के प्रति गंभीर बनाते हैं।
कलेक्टर नम्रता जैन ने कहा कि नारायणपुर के बच्चों में अपार प्रतिभा है। जरूरत है तो बस सही दिशा और अवसर देने की। प्रशासन का प्रयास है कि बच्चों को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उन्हें राष्ट्रीय और वैश्विक मंचों से जोड़ा जाए ताकि वे अपने करियर की संभावनाओं को व्यापक दृष्टि से देख सकें।
‘दिल्ली दूर नहीं’ की कहावत अब पुरानी
अबूझमाड़ के युवाओं के लिए “दिल्ली दूर नहीं” अब महज एक कहावत नहीं, बल्कि एक साकार होती हकीकत है। जिस अंचल के बच्चे कभी शहरों की कल्पना भर करते थे, आज वे देश की सुरक्षा, विज्ञान, तकनीक और विमानन जैसे क्षेत्रों में अपना भविष्य देखने लगे हैं।
गरांजी विद्यालय का यह प्रेरक सत्र इस बात का प्रमाण है कि यदि प्रशासन संवेदनशील हो, तो दूरस्थ अंचलों के बच्चे भी राष्ट्रीय आकांक्षाओं से जुड़ सकते हैं। यह पहल अबूझमाड़ के युवाओं में नई ऊर्जा भरने वाली साबित हो रही है—एक ऐसी ऊर्जा, जो उन्हें सीमाओं से परे सोचने और ऊंचाइयों को छूने की प्रेरणा देती है।
फ्रंट पेज की सुर्खी: उम्मीद की नई सुबह
नारायणपुर जिले में शिक्षा और प्रेरणा की यह पहल सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि अबूझमाड़ के भविष्य की दिशा तय करने वाला संकेत है। फाइटर पायलट विवेक साहू के संवाद और एयरपोर्ट भ्रमण जैसी योजनाओं ने यह संदेश दिया है कि सपनों की उड़ान किसी भौगोलिक सीमा की मोहताज नहीं होती।
आज अबूझमाड़ के बच्चे आसमान की ओर देखते हुए सिर्फ हवाई जहाज नहीं देख रहे—वे अपने सपनों को उड़ते देख रहे हैं। और इन सपनों को पंख देने में जिला प्रशासन, विशेषकर कलेक्टर नम्रता जैन की पहल, एक नई सुबह की तरह उजास बिखेर रही है।




