जनदर्शन में संवेदनशीलता की मिसाल
दिव्यांग गुड्डू कोर्राम को मिली नई रफ्तार, कलेक्टर के निर्देश पर मिली बैटरी चलित ट्राईसाइकिल

कैलाश सोनी-नारायणपुर।कलेक्टर जनदर्शन एक बार फिर संवेदनशील और जनहितैषी प्रशासन का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया। ग्राम करमरी निवासी दिव्यांग गुड्डू कोर्राम (पिता सेबीराम कोर्राम) को जनदर्शन में प्रस्तुत आवेदन पर त्वरित सुनवाई और मौके पर ही सहायता मिली। कलेक्टर नम्रता जैन के निर्देश पर समाज कल्याण विभाग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए गुड्डू को बैटरी चलित ट्राईसाइकिल उपलब्ध कराई, जिससे उनके जीवन में नई गति और आत्मनिर्भरता की राह खुली।
जनदर्शन के दौरान गुड्डू कोर्राम ने आवागमन में हो रही कठिनाइयों और दैनिक जीवन की चुनौतियों को सामने रखा। आवेदन पर संवेदनशील रुख अपनाते हुए कलेक्टर ने विभागीय अमले को तत्काल राहत देने के निर्देश दिए। प्रशासन की तत्परता का नतीजा यह रहा कि सहायता प्रक्रिया में किसी तरह की देरी नहीं हुई और मौके पर ही ट्राईसाइकिल प्रदान कर दी गई।
ग्राम करमरी के किसान परिवार से आने वाले गुड्डू एक दुर्घटना में पेड़ से गिरने के बाद शारीरिक रूप से दिव्यांग हो गए थे। हादसे के बाद उनके लिए खेत-खलिहान का काम करना संभव नहीं रह गया। सीमित संसाधनों और आवागमन की असुविधा के कारण उन्हें परिजनों पर निर्भर रहना पड़ता था। ऐसे में बैटरी चलित ट्राईसाइकिल उनके लिए सिर्फ एक साधन नहीं, बल्कि आत्मसम्मान और स्वावलंबन की ओर बढ़ाया गया कदम बनकर सामने आई है।
ट्राईसाइकिल मिलते ही गुड्डू के चेहरे पर उम्मीद की चमक साफ दिखाई दी। उन्होंने बताया कि अब वे गांव में अपनी आवश्यकताओं के लिए स्वतंत्र रूप से आ-जा सकेंगे और छोटे-मोटे कामकाज कर परिवार का सहारा बन सकेंगे। स्थानीय लोगों ने भी प्रशासन की त्वरित पहल की सराहना की और इसे जरूरतमंदों के लिए भरोसे की मिसाल बताया।
इस अवसर पर कलेक्टर ने गुड्डू को आश्वस्त किया कि आवश्यकता पड़ने पर उनके समुचित उपचार और आगे की सहायता के लिए प्रशासन हरसंभव सहयोग करेगा। जनदर्शन के माध्यम से समय पर मिली मदद ने यह संदेश दिया कि जिला प्रशासन केवल शिकायत सुनने तक सीमित नहीं, बल्कि ज़मीनी स्तर पर त्वरित समाधान के लिए प्रतिबद्ध है।
त्वरित सहायता से भावुक गुड्डू कोर्राम ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया। जनदर्शन की यह पहल बताती है कि संवेदनशील प्रशासनिक निर्णय जरूरतमंदों के जीवन में वास्तविक बदलाव ला सकते हैं—और यही सुशासन की असली पहचान है।




