किताबों से खेतों तक: केशकाल के 75 छात्रों ने केवीके नारायणपुर में सीखा ‘रोज़गार का विज्ञान’

हर्बल गुलाल, मशरूम और वर्मी कम्पोस्ट ने खोली ग्रामीण उद्यमिता की खिड़की…
कैलाश सोनी- नारायणपुर। कक्षा की चारदीवारी से निकलकर जब विद्यार्थी खेतों, प्रयोगशालाओं और उत्पादन इकाइयों के बीच सीखते हैं, तब शिक्षा किताबों की सीमाओं से आगे बढ़कर जीवन कौशल बन जाती है। ऐसा ही जीवंत अनुभव पीएम श्री स्वामी आत्मानंद शासकीय अंग्रेजी माध्यम विद्यालय, केशकाल के 75 छात्र–छात्राओं ने कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), केरलापाल–नारायणपुर के शैक्षणिक भ्रमण के दौरान किया।

भ्रमण के दौरान कृषि विशेषज्ञ डॉ. हरेंद्र, डॉ. आलिया अफरोज एवं डॉ. अंकिता सिंह ने विद्यार्थियों को केंद्र में संचालित विभिन्न इकाइयों का प्रत्यक्ष अवलोकन कराया। बच्चों को हर्बल गुलाल निर्माण, वर्मी कम्पोस्ट, मशरूम उत्पादन और उन्नत नर्सरी प्रबंधन की वैज्ञानिक व व्यावहारिक जानकारी दी गई। प्राकृतिक फूलों और संसाधनों से तैयार होने वाली हर्बल गुलाल इकाई विद्यार्थियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रही, जहां रंगों के पीछे छिपी पर्यावरण–अनुकूल तकनीक को करीब से समझने का अवसर मिला।
विशेषज्ञों ने बताया कि जैविक खेती, जैव–उत्पादों का निर्माण और पौध उत्पादन जैसे क्षेत्र न केवल पर्यावरण संरक्षण से जुड़े हैं, बल्कि ग्रामीण युवाओं के लिए स्वरोजगार के मजबूत विकल्प भी प्रस्तुत करते हैं। विद्यार्थियों ने मशरूम उत्पादन की कम लागत–अधिक लाभ वाली तकनीक, वर्मी कम्पोस्ट से मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के तरीके और नर्सरी प्रबंधन की आधुनिक पद्धतियों को उत्सुकता से जाना।
इस एक्सपोजर विजिट का उद्देश्य विद्यार्थियों को आधुनिक कृषि तकनीकों से व्यावहारिक रूप से जोड़ना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में विज्ञान की भूमिका से परिचित कराना रहा। भ्रमण के दौरान छात्रों में सीखने की तीव्र ललक और नवाचार के प्रति जिज्ञासा स्पष्ट दिखाई दी। शिक्षकों ने इसे पाठ्यक्रम आधारित शिक्षा को जमीन से जोड़ने की दिशा में एक सार्थक पहल बताया।
संदेश साफ है—आज का छात्र अगर खेती को विज्ञान और उद्यमिता के नजरिए से समझ ले, तो कल का भारत स्वावलंबन और हरित विकास की राह पर और तेज़ी से आगे बढ़ सकता है।




