अबूझमाड़ में इंसानियत की जीत: गहरे गड्ढे में फंसे कुत्ते को डीआरजी जवानों ने बचाया

6–7 दिनों से फंसा था बेजुबान, दुर्गम जंगल में साहसिक रेस्क्यू कर सुरक्षित निकाला बाहर
कैलाश सोनी- नारायणपुर। अबूझमाड़ के दुर्गम इलाकों में जहां सुरक्षा बल नक्सल उन्मूलन अभियान के तहत लगातार कठिन परिस्थितियों में डटे हैं, वहीं नारायणपुर पुलिस और डीआरजी जवानों ने इंसानियत की मिसाल पेश करते हुए एक बेजुबान की जान बचाई। थाना ओरछा क्षेत्रांतर्गत माड़ोड़ा जंगल में गहरे गड्ढे में पिछले 6–7 दिनों से फंसे एक देशी कुत्ते को डीआरजी जवानों ने साहसिक रेस्क्यू अभियान चलाकर सुरक्षित बाहर निकाला।

प्राप्त जानकारी के अनुसार 18 फरवरी की सुबह करीब 9 बजे नक्सल विरोधी अभियान ड्यूटी के दौरान जवानों की नजर जंगल के भीतर एक गहरे गड्ढे में फंसे कुत्ते पर पड़ी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए निरीक्षक सीताराम सागर के नेतृत्व में डीआरजी की टीम ने तत्काल रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों और सीमित संसाधनों के बावजूद जवानों ने संयम, धैर्य और संवेदनशीलता का परिचय देते हुए कुत्ते को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि क्षेत्र में जंगली सूअर के शिकार के लिए अज्ञात लोगों द्वारा खोदे गए गड्ढों में यह कुत्ता गिर गया था और कई दिनों से वहीं फंसा हुआ था। लंबे समय तक फंसे रहने के कारण उसकी हालत कमजोर हो चुकी थी। रेस्क्यू के बाद जवानों ने उसे पानी पिलाया और प्राथमिक देखभाल सुनिश्चित की।
डीआरजी जवानों की यह पहल केवल सुरक्षा ड्यूटी तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह संदेश भी दिया कि कानून व्यवस्था के साथ-साथ जीव-जंतुओं के प्रति संवेदनशीलता और करुणा भी पुलिस बल की कार्यसंस्कृति का अहम हिस्सा है। इस मानवीय प्रयास की स्थानीय स्तर पर सराहना की जा रही है और इसे समाज में पुलिस की सकारात्मक छवि को मजबूत करने वाला कदम माना जा रहा है।
अबूझमाड़ जैसे संवेदनशील और दुर्गम क्षेत्रों में तैनात सुरक्षा बलों का यह मानवीय पक्ष न केवल भरोसे को सुदृढ़ करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि विपरीत परिस्थितियों में भी संवेदना और सेवा की भावना जीवित है।




