अबूझमाड़ के धुरबेड़ा में घर-घर पहुंचा जीवन का जल

जल जीवन मिशन से बदली गांव की तस्वीर, 54 परिवारों को मिला शुद्ध पेयजल
घने जंगल-पहाड़ों के बीच बसे गांव में खत्म हुई पानी की जद्दोजहद
कैलाश सोनी- नारायणपुर। अबूझमाड़ के दुर्गम अंचल में बसे ग्राम धुरबेड़ा की पहचान अब केवल घने जंगलों और दुर्गम पहाड़ी रास्तों तक सीमित नहीं रही। वर्षों से मूलभूत सुविधाओं के अभाव से जूझ रहे इस गांव में जल जीवन मिशन के तहत घर-घर शुद्ध पेयजल पहुंचने से ग्रामीण जीवन की तस्वीर बदल गई है। जिला मुख्यालय नारायणपुर से करीब 65 किलोमीटर दूर स्थित धुरबेड़ा में अब 54 परिवारों के घरों तक नल के माध्यम से स्वच्छ पानी की आपूर्ति शुरू हो चुकी है।
कभी इस गांव की महिलाओं की सुबह नदी-नालों से पानी ढोते हुए शुरू होती थी। बरसात में उफनते नालों को पार करना जोखिम भरा होता, तो गर्मियों में सूखते जलस्रोत नई चिंता खड़ी कर देते थे। पानी जुटाने में घंटों लग जाने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती थी और स्वच्छ जल के अभाव में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी सामने आती थीं। अब जल जीवन मिशन ने ग्रामीणों की इस रोजमर्रा की परेशानी को काफी हद तक खत्म कर दिया है।
योजना के तहत धुरबेड़ा में 56.79 लाख रुपये की लागत से 2430 मीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई गई है। साथ ही 10-10 हजार लीटर क्षमता की दो सोलर टंकियां स्थापित की गईं, जिससे बिजली की अनुपलब्धता के बावजूद नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित हो सके। दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों में इस परियोजना को अमलीजामा पहनाना आसान नहीं था, लेकिन प्रशासन, तकनीकी अमले और ग्रामीणों के सामूहिक प्रयास से कार्य समयबद्ध रूप से पूरा किया गया।
ग्रामीणों का कहना है कि अब उन्हें पानी के लिए कई किलोमीटर दूर नहीं जाना पड़ता। महिलाओं का समय बच रहा है, बच्चे पढ़ाई और खेल में अधिक समय दे पा रहे हैं। गांव में स्वच्छता की स्थिति में सुधार के साथ स्वास्थ्य स्तर भी बेहतर हुआ है। शुद्ध जल की उपलब्धता ने धुरबेड़ा में केवल सुविधा नहीं बढ़ाई, बल्कि जीवन की गुणवत्ता में ठोस बदलाव लाया है।
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, अबूझमाड़ जैसे दुर्गम क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाएं पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है। जल जीवन मिशन के माध्यम से शुद्ध पेयजल की पहुंच ने यह साबित किया है कि योजनाएं जब जमीन पर उतरती हैं, तो दूरस्थ अंचलों के जीवन में भी ठोस परिवर्तन संभव है। धुरबेड़ा की कहानी अब विकास की उस धारा की मिसाल बन रही है, जो जंगल-पहाड़ों को पार कर गांव की देहरी तक पहुंच रही है।




