अबूझमाड़ के जंगलों में नक्सलियों का बड़ा ठिकाना बेनकाब

कैलाश सोनी- नारायणपुर। अबूझमाड़ क्षेत्र में चलाए जा रहे सघन नक्सल विरोधी अभियानों के बीच सुरक्षा बलों को एक बड़ी और निर्णायक सफलता हाथ लगी है। भारत तिब्बत सीमा पुलिस बल (आईटीबीपी) की 38वीं वाहिनी ने अग्रिम सीओबी जाटलूर से संचालित अभियान के दौरान नक्सलियों द्वारा छुपाकर रखा गया एक महत्वपूर्ण डम्प बरामद किया है। यह कार्रवाई अबूझमाड़ के दुर्गम और संवेदनशील जंगल क्षेत्र में नक्सल नेटवर्क के लिए बड़ा झटका मानी जा रही है।

सूचना तंत्र के आधार पर जैसे ही नक्सली डम्प की जानकारी मिली, 38वीं वाहिनी के कमांडेंट रोशन सिंह असवाल के मार्गदर्शन में त्वरित और रणनीतिक कार्रवाई को अंजाम दिया गया। सीओबी जाटलूर से लगभग 3.5 किलोमीटर पश्चिम, हाइट-669 क्षेत्र में एडीपी और बीडीएस टीम द्वारा संयुक्त रूप से सर्च ऑपरेशन चलाया गया। पूरे इलाके की घेराबंदी कर गहन तलाशी अभियान चलाया गया, ताकि किसी भी संभावित खतरे को पहले ही निष्क्रिय किया जा सके।
नक्सली डम्प मिलने के बाद ऑपरेशन कमांडर राम कुमार मौर्य, सहायक सेनानी/जीडी के निर्देश पर बम निरोधक दस्ता (बीडीडीएस) को मौके पर बुलाया गया। सुरक्षा मानकों के अनुरूप पूरे क्षेत्र की जांच की गई और विस्फोटक खतरे की पुष्टि के बाद बरामद सामग्री को सुरक्षित रूप से कैंप लाया गया।
हैंड ग्रेनेड से लेकर नक्सली साहित्य तक बरामद
तलाशी के दौरान नक्सली डम्प से हैंड ग्रेनेड, पावर बैंक, डायरी, नक्सली बैनर, प्रेस सामग्री, कैमोफ्लाज बैग, पुरुष एवं महिला कपड़े, नक्सली वर्दी, बैडशीट, रैंक (स्टार), टॉर्च, एयरफोन, फोटोग्राफ और दवाइयों सहित बड़ी मात्रा में सामग्री बरामद की गई। दुर्गम क्षेत्र और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कुछ अनुपयोगी सामग्री को मौके पर ही नियमानुसार नष्ट किया गया, जबकि शेष सामग्री को बीडीडीएस की क्लियरेंस के बाद सुरक्षित रूप से सीओबी जाटलूर लाया गया।
बिना किसी नुकसान के अभियान सफल
पूरे ऑपरेशन के दौरान किसी भी प्रकार की जनहानि नहीं हुई और न ही सुरक्षा बलों को कोई क्षति पहुंची। बरामद सामग्री का विधिवत जब्ती मेमो तैयार कर थाना ओरछा, नारायणपुर को सुपुर्द किया जा रहा है, ताकि आगे की वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
नक्सल मुक्त बस्तर की ओर एक और कदम
सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, अबूझमाड़ क्षेत्र में लगातार सर्च ऑपरेशन चलाकर नक्सल नेटवर्क की कमर तोड़ने की रणनीति पर काम किया जा रहा है। 38वीं वाहिनी द्वारा भविष्य में भी इसी प्रकार के सघन अभियानों को जारी रखने की योजना है। यह कार्रवाई न केवल नक्सलियों की गतिविधियों पर करारा प्रहार है, बल्कि 31 मार्च 2026 तक नक्सल मुक्त भारत के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।




