नारायणपुर

अबूझमाड़ की मिट्टी से निकली किताब, राष्ट्रीय मंच पर गूंजेगा हल्बा इतिहास

डॉ. भागेश्वर पात्र की पुस्तक ‘हल्बा जनजातीय: इतिहास एवं संस्कृति’ का 21 फरवरी को रायपुर में विमोचन…

नारायणपुर, 18 फरवरी 2026। अबूझमाड़ जैसे दुर्गम और लंबे समय तक उपेक्षित रहे अंचल से निकलकर हल्बा जनजाति के इतिहास और संस्कृति को राष्ट्रीय साहित्यिक मंच तक पहुंचाने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल होने जा रही है। नारायणपुर जिले के सोनपुर निवासी तथा हल्बा जनजाति से संबंध रखने वाले वरिष्ठ साहित्यकार व शिक्षाविद डॉ. भागेश्वर पात्र की शोधपरक पुस्तक ‘हल्बा जनजातीय: इतिहास एवं संस्कृति’ का विमोचन 21 फरवरी को रायपुर में आयोजित सरस्वती साहित्य सम्मान समारोह 2026 के अवसर पर किया जाएगा।

सरस्वती बुक्स प्रकाशन, भिलाई एवं साईंनाथ फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में यह साहित्यिक आयोजन रायपुर के वीमतारा ऑडिटोरियम, शांति नगर में आयोजित होगा। समारोह में प्रदेश के प्रतिष्ठित साहित्यकारों की उपस्थिति के बीच बस्तर अंचल की जनजातीय विरासत, संस्कृति और इतिहास पर गंभीर विमर्श होगा।

इस वर्ष का सरस्वती साहित्य सम्मान 2026 बस्तर अंचल के वरिष्ठ साहित्यकार रुद्र नारायण पाणिग्राही को प्रदान किया जाएगा। साथ ही 20 नवोदित साहित्यकारों को भी सम्मानित किया जाएगा, जिससे क्षेत्रीय साहित्य को नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद है।

कार्यक्रम की एक विशेष उपलब्धि यह होगी कि अबूझमाड़ अंचल की सांस्कृतिक उपस्थिति को मंच पर स्थान मिलेगा। नारायणपुर जिले के वरिष्ठ साहित्यकार शिव कुमार पाण्डेय परिचर्चा सत्र में सहभागिता करेंगे। इस अवसर पर प्रस्तावित परिचर्चा का विषय “बस्तर: इतिहास, संस्कृति एवं पर्यटन” रखा गया है, जिसमें क्षेत्र की जड़ों से जुड़ी विरासत को समकालीन परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत किया जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि डॉ. भागेश्वर पात्र की पुस्तक हल्बा जनजाति के सामाजिक जीवन, परंपराओं, ऐतिहासिक यात्रा और सांस्कृतिक पहचान को दस्तावेजी रूप देने का महत्वपूर्ण प्रयास है। यह कृति न केवल शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों के लिए उपयोगी सिद्ध होगी, बल्कि आदिवासी समाज की समृद्ध परंपरा को व्यापक समाज तक पहुंचाने का सेतु भी बनेगी।

अबूझमाड़ जैसे पिछड़े और दूरस्थ अंचल से साहित्यिक सृजन का राष्ट्रीय मंच तक पहुंचना इस बात का संकेत है कि बस्तर की आवाज अब सीमाओं को लांघ रही है। इस विमोचन कार्यक्रम से क्षेत्र में साहित्यिक गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलेगा और नव लेखकों को अपनी पहचान बनाने की प्रेरणा भी मिलेगी।

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