लोकभवन रायपुर में ब्रेल व ऑडियो पुस्तकों का ऐतिहासिक विमोचन
राज्यपाल रमेन डेका ने किया सम्मान, ब्रजेश्वरी रावटे बनीं दिव्यांग शिक्षा की प्रेरणा

रायपुर। दृष्टिबाधित बच्चों और दिव्यांगजनों के शैक्षणिक सशक्तिकरण की दिशा में छत्तीसगढ़ ने एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। राजधानी रायपुर स्थित लोकभवन में आयोजित गरिमामय समारोह में दो ब्रेल पुस्तकों तथा 3000 से अधिक ऑडियो बुक्स का भव्य विमोचन छत्तीसगढ़ के महामहिम राज्यपाल रमेन डेका के करकमलों से संपन्न हुआ। इस अवसर पर शिक्षा और सामाजिक संवेदनशीलता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रधान अध्यापक ब्रजेश्वरी रावटे को विशेष रूप से सम्मानित किया गया।

समारोह में “खुली पाठशाला” पहल के अंतर्गत तैयार की गई “आवाजों की दिव्यांग महिलाओं की सफलता की कहानी” तथा “छत्तीसगढ़ के वीर” नामक ब्रेल पुस्तकों का विमोचन किया गया। यह पहल दृष्टिबाधित विद्यार्थियों के लिए अध्ययन को सरल, सुलभ और प्रभावी बनाने की दिशा में एक अभिनव प्रयास के रूप में सामने आई है।
डेढ़ वर्ष की मेहनत का परिणाम
कार्यक्रम में बताया गया कि राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित शिक्षिका शारदा मैडम ने करीब डेढ़ वर्ष पूर्व दृष्टिबाधित व्यक्तियों के एक समूह से जुड़ने के दौरान यह अनुभव किया कि अधिकांश दृष्टिबाधित बच्चे ऑडियो माध्यम से अध्ययन को अधिक सहज पाते हैं। इसी अनुभव से प्रेरित होकर ब्रेल पुस्तकों के साथ-साथ व्यापक स्तर पर ऑडियो सामग्री तैयार करने की योजना बनाई गई।
इस अभियान में श्रीमती ब्रजेश्वरी रावटे ने सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने भारत के लोक नृत्यों, छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन स्थलों तथा बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को हिंदी, हल्बी और छत्तीसगढ़ी भाषाओं में अपने स्वर में रिकॉर्ड कर ऑडियो श्रृंखला के रूप में प्रस्तुत किया। यह सामग्री न केवल शैक्षणिक बल्कि सांस्कृतिक दृष्टि से भी दृष्टिबाधित बच्चों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो रही है।
शिक्षकों का सामूहिक प्रयास
ब्रेल और ऑडियो पुस्तकों की यह पहल केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रही। राज्य के विभिन्न जिलों से उत्कृष्ट शिक्षकों के एक समूह ने मिलकर सभी स्तरों की विषयवस्तु, सामान्य ज्ञान और प्रेरणादायी सामग्री को ऑडियो रूप में तैयार किया, ताकि दृष्टिबाधित बच्चों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाई जा सके।
राज्यपाल ने की सराहना
राजभवन में आयोजित कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल रमेन डेका ने इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि यह एक संवेदनशील और अनोखी पहल है। शिक्षा केवल देखने वालों के लिए नहीं, बल्कि हर उस मन के लिए है जो सीखना चाहता है। उन्होंने अपेक्षा जताई कि ये ऑडियो बुक्स देश के सभी दृष्टिबाधित बच्चों तक पहुंचें और भविष्य में अन्य भाषाओं में भी उपलब्ध कराई जाएं।
ब्रेल पुस्तकों का विस्तार
कार्यक्रम में यह भी जानकारी दी गई कि दिव्यांग बच्चों के लिए ब्रेल पुस्तकों का निर्माण शारदा मैडम ने प्रीति शांडिल्य के सहयोग से किया है। आने वाले समय में इस पहल को और व्यापक रूप देने की योजना है, ताकि छत्तीसगढ़ मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर अपनाया जा सके।
लोकभवन में आयोजित यह समारोह न केवल एक विमोचन कार्यक्रम रहा, बल्कि यह संदेश भी दे गया कि संवेदनशीलता, नवाचार और समर्पण से शिक्षा की दुनिया में वास्तविक परिवर्तन संभव है।




