नारायणपुर

मुख्यमंत्री के दौरे से पहले प्रशासन का अनोखा कारनामा

आग बुझाने वाली फायर ब्रिगेड से धोई गई घोटुल में लगी सड़क की धूल

नारायणपुर। नारायणपुर जिले में मुख्यमंत्री के प्रस्तावित दौरे से पहले जिला प्रशासन का ऐसा दृश्य सामने आया है, जिसने न सिर्फ स्थानीय लोगों को चौंकाया है, बल्कि प्रशासनिक प्राथमिकताओं पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। आग की आपात स्थिति में जान-माल बचाने के लिए दौड़ने वाली फायर ब्रिगेड की गाड़ी इस बार आग नहीं, बल्कि सड़क की धूल बुझाने में जुटी नजर आई। वह भी उस घोटुल के सामने, जो आदिवासी संस्कृति की पहचान और गौरव का प्रतीक माना जाता है।

दरअसल, 30 जनवरी को प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय नारायणपुर जिले के गढ़बेगाल गांव पहुंचकर वहां बने घोटुल का निरीक्षण करेंगे। इस दौरान उनका पद्मश्री सम्मानित आदिवासी कलाकार पंडीराम मंडावी, पद्मश्री वैद्य हेमचंद मांझी और गांव के वरिष्ठ ग्रामीणों के साथ भोजन कार्यक्रम भी प्रस्तावित है। मुख्यमंत्री के इस दौरे की खबर मिलते ही जिला प्रशासन अचानक हरकत में आ गया। वर्षों से उपेक्षित पड़ी व्यवस्थाएं चंद घंटों में दुरुस्त करने का अभियान शुरू हो गया।

वीआईपी कार्यक्रम तय होते ही बदला नज़ारा

गढ़बेगाल स्थित यह घोटुल राष्ट्रीय राजमार्ग एनएच-130D के किनारे बना है। सड़क पर दिन-रात गुजरने वाले भारी वाहनों के कारण उड़ने वाली धूल ने घोटुल की दीवारों, खंभों और उस पर बनी आदिवासी कला को महीनों से ढक रखा था। स्थानीय ग्रामीणों ने कई बार मौखिक रूप से और जनप्रतिनिधियों के माध्यम से भी इसकी शिकायत की, लेकिन तब प्रशासन ने इस ओर ध्यान देना जरूरी नहीं समझा।

लेकिन जैसे ही मुख्यमंत्री के दौरे की तारीख तय हुई, वही धूल अचानक प्रशासन की आंखों में चुभने लगी। आनन-फानन में सफाई अभियान शुरू किया गया। सड़क किनारे की झाड़ियों की कटाई, दीवारों की पोताई, सजावट और रंग-रोगन के साथ-साथ धूल हटाने के लिए फायर ब्रिगेड वाहन को लगा दिया गया। देखते ही देखते पानी की तेज धार से सड़क की धूल धोई जाने लगी।

फायर ब्रिगेड से सफाई, प्राथमिकताओं पर सवाल

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पहला मौका है, जब फायर ब्रिगेड को आग बुझाने की बजाय सड़क धोने के लिए इस्तेमाल किया गया। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि अगर इसी तरह नियमित रूप से पानी का छिड़काव किया जाता, तो महीनों से घोटुल धूल में नहाता नजर नहीं आता।

लोगों का यह भी कहना है कि गर्मी के मौसम में जिले में आग की घटनाएं आम हैं। जंगलों और ग्रामीण इलाकों में आग लगने की सूचना पर फायर ब्रिगेड की हर गाड़ी की अहम भूमिका होती है। ऐसे में उसे वीआईपी कार्यक्रम की तैयारी में झोंक देना, आपात स्थितियों के प्रति प्रशासन की गंभीरता पर भी सवाल खड़े करता है।

धरोहर है घोटुल, लेकिन देखरेख दिखावे तक सीमित

गढ़बेगाल का यह घोटुल केवल एक भवन नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की आत्मा और सांस्कृतिक पहचान का जीवंत प्रतीक है। इसे पद्मश्री सम्मानित कलाकार पंडीराम मंडावी ने अपनी कला से सजाया है। घोटुल के स्वागत द्वार से लेकर खंभों और दीवारों तक आदिवासी जीवन के हर पहलू को उकेरा गया है—
खेती-बाड़ी, जंगल, पहाड़, शिकार, लोकनृत्य, संगीत, सामाजिक मेलजोल और प्रकृति के साथ सहजीवन की झलक हर चित्र में दिखाई देती है।

देश ही नहीं, विदेशों से भी कला प्रेमी और शोधकर्ता इस घोटुल को देखने आते हैं। बावजूद इसके, इसकी नियमित साफ-सफाई, रखरखाव और संरक्षण पर ध्यान नहीं दिया गया। महीनों तक धूल और गंदगी से घिरा यह घोटुल प्रशासन की उदासीनता का मूक गवाह बना रहा।

ग्रामीणों में नाराजगी, सवालों की बौछार

मुख्यमंत्री के दौरे से ठीक पहले अचानक शुरू हुई इस ‘विशेष सफाई’ को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी भी देखने को मिल रही है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर यह घोटुल सचमुच प्रशासन की प्राथमिकता में होता, तो इसे वीआईपी दौरे के इंतजार में धूल में नहीं छोड़ा जाता।

ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि क्या विकास और संरक्षण केवल कैमरों के सामने दिखाने के लिए ही होता है? क्या आदिवासी संस्कृति और धरोहर की चिंता केवल तब होती है, जब कोई बड़ा नेता आने वाला हो?

दिखावटी तैयारियों की पुरानी कहानी

यह पहला मौका नहीं है, जब वीआईपी दौरे से पहले प्रशासन की सक्रियता अचानक बढ़ी हो। जिले में पहले भी कई बार ऐसा देखा गया है कि सड़कों के गड्ढे, टूटे नाले, गंदगी और अव्यवस्थाएं महीनों तक जस की तस रहती हैं, लेकिन किसी मंत्री या मुख्यमंत्री के आने की सूचना मिलते ही रातोंरात सब कुछ चमकाने की कवायद शुरू हो जाती है।

गढ़बेगाल घोटुल के मामले में भी कुछ ऐसा ही दृश्य सामने आया। महीनों तक उड़ती धूल से कला धूमिल होती रही, लेकिन अब फायर ब्रिगेड से पानी डालकर उसे धोया जा रहा है, ताकि मुख्यमंत्री के सामने सब कुछ ‘साफ-सुथरा’ दिखे।

प्रशासन की सफाई, लेकिन संतोष नहीं

इस पूरे मामले पर प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर सुरक्षा और स्वच्छता के विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। फायर ब्रिगेड का उपयोग केवल अस्थायी रूप से धूल नियंत्रण के लिए किया गया है।

हालांकि, इस सफाई से स्थानीय लोग संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि अस्थायी इंतजामों से समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकलता। सड़क पर नियमित पानी छिड़काव, हरियाली और स्थायी धूल नियंत्रण की व्यवस्था जरूरी है, ताकि घोटुल जैसी धरोहरें सालभर सुरक्षित और स्वच्छ रह सकें।

सवाल यही—दौरे के बाद क्या?

अब बड़ा सवाल यह है कि मुख्यमंत्री के दौरे के बाद क्या यह सफाई अभियान जारी रहेगा? या फिर जैसे ही वीआईपी काफिला लौटेगा, वैसे ही व्यवस्थाएं फिर पुराने हालात में पहुंच जाएंगी?

गढ़बेगाल का घोटुल केवल एक कार्यक्रम स्थल नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की पहचान है। उसकी देखरेख दिखावे के लिए नहीं, बल्कि सम्मान और संवेदनशीलता के साथ होनी चाहिए।

फिलहाल, फायर ब्रिगेड से धूल धुलवाने का यह दृश्य जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है—और प्रशासन की प्राथमिकताओं पर एक तीखा सवाल भी छोड़ गया है।

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