बस्तर पंडुम 2026 में सजी आदिवासी संस्कृति की रंगीन छटा
ओरछा–कोहकामेटा में लोककला, परंपरा और जीवनशैली का भव्य प्रदर्शन

नारायणपुर। जनजातीय बहुल बस्तर संभाग की समृद्ध लोकसंस्कृति, परंपरा और जीवनशैली को सहेजने के उद्देश्य से ओरछा विकासखंड में बस्तर पंडुम 2026 का भव्य आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में आयोजित इस सांस्कृतिक महोत्सव ने ओरछा और कोहकामेटा को उत्सव के रंगों से सराबोर कर दिया।

ओरछा विकासखंड अंतर्गत ग्राम ओरछा में 15 जनवरी तथा ग्राम कोहकामेटा में 17 जनवरी को हुए आयोजनों में आदिवासी कला और संस्कृति की जीवंत झलक देखने को मिली। बस्तर अंचल की लोककला, शिल्प, तीज-त्यौहार, खानपान, बोली-भाषा, रीति-रिवाज, वेश-भूषा, आभूषण और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की मनोहारी प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

लोकसंस्कृति संरक्षण का सशक्त मंच
बस्तर पंडुम 2026 के माध्यम से जनजातीय समाज की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन पर विशेष जोर दिया गया। पारंपरिक नृत्य, गीत-संगीत, नाट्य, आंचलिक साहित्य, वन औषधि, पारंपरिक व्यंजन और पेय पदार्थों के मूल स्वरूप को प्रदर्शित कर लोकसंस्कृति को नई पीढ़ी से जोड़ा गया।

12 पारंपरिक विधाओं का प्रभावशाली प्रदर्शन
विभिन्न अंचलों से आए प्रतिभागियों ने बस्तर की 12 पारंपरिक सांस्कृतिक विधाओं में नृत्य, संगीत, पारंपरिक वाद्य, हस्तशिल्प, वन औषधि और स्थानीय व्यंजनों का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। कलाकारों का कहना था कि बस्तर पंडुम लोक परंपराओं के संरक्षण के साथ-साथ युवा पीढ़ी में सांस्कृतिक गर्व की भावना को मजबूत करने और ग्रामीण कलाकारों को व्यापक पहचान दिलाने का सशक्त माध्यम बन रहा है।
कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, ग्रामीणों, अधिकारी-कर्मचारियों सहित बड़ी संख्या में कलाकारों और प्रतिभागियों की उपस्थिति रही। जनसहभागिता और उत्साह से भरे इस आयोजन ने बस्तर की सांस्कृतिक समृद्धि को एक बार फिर प्रदेश और देश के सामने प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।




