बसंत पंचमी पर स्वामी आत्मानंद महाविद्यालय में भव्य पुस्तक प्रदर्शनी

नारायणपुर | शासकीय स्वामी आत्मानंद स्नातकोत्तर महाविद्यालय नारायणपुर के ग्रंथालय विभाग द्वारा बसंत पंचमी के पावन अवसर पर ग्रंथालय परिसर में भव्य पुस्तक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। प्रदर्शनी का उद्घाटन महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. एस. आर. कुंजाम ने मां सरस्वती के छायाचित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन कर किया।

इस अवसर पर प्राचार्य डॉ. कुंजाम ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि छात्र-छात्राओं को अपने पाठ्यक्रम के अध्ययन के साथ-साथ साहित्यिक एवं प्रेरणादायक पुस्तकों के अध्ययन के लिए भी समय निकालना चाहिए। इससे उनके मन-मस्तिष्क में नए विचारों का विकास होता है तथा सोचने-समझने की क्षमता में वृद्धि होती है।
कार्यक्रम में महाविद्यालय के सहायक प्राध्यापक बी.डी. चांडक ने कहा कि पुस्तकें मनुष्य की कल्पनाशक्ति को विस्तार देती हैं, इसलिए नियमित रूप से पुस्तकों का अध्ययन करना अत्यंत आवश्यक है। वहीं महाविद्यालय के लाइब्रेरियन संजय कुमार पटेल ने बताया कि पुस्तक प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य छात्र-छात्राओं को पुस्तकों के निकट लाना एवं उन्हें नियमित अध्ययन के लिए प्रेरित करना है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन ग्रंथालय में उपलब्ध पुस्तकों की जानकारी विद्यार्थियों तक पहुंचाने, पुस्तकों के उपयोग को बढ़ाने तथा समाज में पुस्तकालय की महत्ता और आवश्यकता को रेखांकित करने की सोच के साथ किया गया है।
पुस्तक प्रदर्शनी में टाइम मैनेजमेंट, यू तारे बने, सम्मान से जीएं, कामयाबी के अनमोल रहस्य, असफल होना जरूरी क्यों है, डायनैमिक मेमोरी मेथड्स, बेचना सीखो और सफल बनो जैसी प्रेरणादायक पुस्तकों के साथ-साथ प्रतिष्ठित भारतीय एवं अंतरराष्ट्रीय व्यक्तित्व कोश, भारत के सपूत तथा जनजातियों से संबंधित विशेष पुस्तकें—धुरवा जनजाति, पुरखती कागजात, मुंडा जनजाति, कोया-कुटमा, मुरिया जनजाति, भतरा जनजाति एवं हल्बा जनजाति का सामाजिक ताना-बाना—आकर्षण का केंद्र रहीं।
इस अवसर पर सहायक प्राध्यापक डॉ. सुमित श्रीवास्तव, विकास चंद्र विशाल, अतिथि व्याख्याता डॉ. मीनाक्षी ठाकुर, डॉ. वंदना नेताम, डॉ. विजय लाल तिवारी, डॉ. मिंटू गौतम, डॉ. गोपाल, डॉ. प्रज्ञा सिंह सहित महाविद्यालय के अन्य सहायक प्राध्यापक, अतिथि व्याख्याता एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। पुस्तक प्रदर्शनी को विद्यार्थियों ने विशेष रुचि के साथ देखा और सराहा।




