नारायणपुर

कच्चे रास्ते और जंगल पार कर बाइक से अंतिम छोर तक पहुंचीं कलेक्टर नम्रता

आदिंगपार–धुरबेड़ा पहुंचने वाली जिले की पहली कलेक्टर, ग्रामीणों में दिखा भरोसा…

(कैलाश सोनी) नारायणपुर, 02 जनवरी 2026।
जो इलाके कभी नक्सलियों की कथित राजधानी कहे जाते थे, जहां वर्षों तक प्रशासन का पहुंचना असंभव माना जाता रहा, वहां अब जिला प्रशासन स्वयं कच्चे रास्तों और जंगलों को पार कर पहुंच रहा है। यह बदलाव सिर्फ प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर शासन की बढ़ती पकड़ और नक्सलवाद के सिमटते दायरे का स्पष्ट संकेत है।

जिले की कलेक्टर नम्रता जैन शुक्रवार को बाइक से आदिंगपार और धुरबेड़ा जैसे अति दुर्गम गांवों तक पहुंचीं। यह वही क्षेत्र है, जो दशकों तक नक्सली गतिविधियों का केंद्र माना जाता रहा और जहां प्रशासनिक उपस्थिति लंबे समय तक नाममात्र की थी। कलेक्टर नम्रता जैन इन गांवों तक पहुंचने वाली जिले की पहली कलेक्टर बनीं।


जहां प्रशासन का नाम भी डराता था, वहां अब संवाद

कच्चे रास्ते, पहाड़ी ढलान, घने जंगल और धूल भरे मार्ग—इन सबको पार कर कलेक्टर का बाइक से गांव तक पहुंचना ग्रामीणों के लिए आश्चर्य और भरोसे का विषय बना।
ग्रामीणों ने खुलकर अपनी समस्याएं साझा कीं। महिलाओं और बच्चों से सीधे संवाद कर कलेक्टर ने यह संदेश दिया कि अब शासन दूर नहीं, बल्कि उनके बीच खड़ा है।


75 किलोमीटर दूर बसे गांवों में प्रशासन की सीधी मौजूदगी

कलेक्टर नम्रता जैन ने जिला मुख्यालय से लगभग 75 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम आदिंगपार और धुरबेड़ा पहुंचकर प्रशासनिक व्यवस्थाओं, शासकीय संस्थाओं और जनकल्याणकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत को परखा।
यह भ्रमण केवल औपचारिक नहीं था, बल्कि प्रत्येक पहलू को गंभीरता से समझने का प्रयास था।


बालक आश्रम छात्रावास का औचक निरीक्षण

धुरबेड़ा पहुंचकर कलेक्टर ने बालक आश्रम छात्रावास का औचक निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान—

  • भोजन की गुणवत्ता
  • पेयजल व्यवस्था
  • स्वच्छता और शौचालय
  • आवासीय कक्षों की स्थिति
  • उपलब्ध संसाधनों

की विस्तार से समीक्षा की गई।


बच्चों से सीधे सवाल, शिक्षा स्तर का आकलन

कलेक्टर ने छात्रावास में अध्ययनरत बच्चों से सीधे संवाद किया।
पहाड़ा, अंग्रेजी अक्षर ज्ञान और सामान्य प्रश्न पूछकर शैक्षणिक स्तर का आकलन किया गया।
बच्चों के संतोषजनक उत्तरों पर कलेक्टर ने उन्हें प्रोत्साहित किया और नियमित अध्ययन के लिए प्रेरित किया।


छात्रावास की जरूरतों पर त्वरित निर्देश

छात्रावास अधीक्षक द्वारा—

  • अतिरिक्त शौचालय निर्माण
  • खेल सामग्री
  • अधीक्षक निवास कक्ष निर्माण

की मांग रखी गई।
कलेक्टर नम्रता जैन ने संबंधित विभागों को आवश्यक प्रस्ताव तैयार कर शीघ्र स्वीकृति की प्रक्रिया प्रारंभ करने के निर्देश दिए।


स्वास्थ्य और पेयजल व्यवस्था का जायजा

कलेक्टर ने धुरबेड़ा उप-स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण किया।
नल-जल योजना के तहत उपलब्ध पेयजल व्यवस्था की भी जांच की गई।
ग्रामीणों से उपचार, दवा उपलब्धता और स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर फीडबैक लिया गया।


आदिंगपार में पंचायत और ग्रामीणों से सीधा संवाद

ग्राम आदिंगपार पहुंचकर कलेक्टर ने ग्राम पंचायत धुरबेड़ा की सरपंच श्रीमती सुदनी ध्रुव एवं ग्रामीणों के साथ बैठक की।
इस दौरान—

  • आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति
  • पहुंच मार्ग
  • शिक्षा, स्वास्थ्य और पेयजल
  • अन्य मूलभूत आवश्यकताओं

पर विस्तार से चर्चा की गई।


आंगनबाड़ी और आश्रित गांवों पर फोकस

कलेक्टर ने कोड़नार आंगनबाड़ी केंद्र का निरीक्षण कर—

  • साफ-सफाई
  • बच्चों का पंजीयन
  • टीएचआर वितरण

की समीक्षा की।
आश्रित गांवों में नए आंगनबाड़ी केंद्रों की आवश्यकता को देखते हुए प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए गए।


ग्राम कुतुल की मांगें भी सुनीं

ग्राम कुतुल में सरपंच और ग्रामीणों ने—

  • बाजार शेड
  • नल-जल पाइपलाइन मरम्मत
  • पुलिया निर्माण
  • सीसी सड़क

की मांग रखी।
कलेक्टर ने इन मांगों को प्राथमिकता के आधार पर परीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई का भरोसा दिलाया।


युवाओं को रोजगार से जोड़ने पर जोर

भ्रमण के दौरान बेरोजगार युवाओं को आरसेटी (RSETI) के माध्यम से प्रशिक्षण दिलाकर स्वरोजगार से जोड़ने की योजना पर चर्चा की गई।
कलेक्टर ने अधिकारियों को युवाओं को योजनाओं से जोड़ने के निर्देश दिए।


नक्सलवाद से प्रशासन की ओर बढ़ता विश्वास

यह वही इलाका है, जहां कभी प्रशासनिक उपस्थिति न के बराबर थी।
जहां सरकारी अधिकारी पहुंचने से पहले कई बार सुरक्षा हालातों पर विचार करना पड़ता था।
आज उसी इलाके में कलेक्टर का बाइक से पहुंचना यह दर्शाता है कि नक्सलवाद का प्रभाव लगातार सिमट रहा है और प्रशासनिक पकड़ मजबूत हो रही है।


महिलाओं और बच्चों में दिखा भरोसा

महिलाओं ने कलेक्टर से खुलकर संवाद किया।
बच्चों के साथ तस्वीरें खिंचीं, मुस्कान दिखी—यह भरोसे का सबसे बड़ा संकेत रहा।
ग्रामीणों का कहना था कि पहली बार किसी कलेक्टर को इतनी नजदीक से अपनी समस्याएं सुनते देखा है।


प्रशासनिक टीम रही साथ

भ्रमण के दौरान—

  • एडीशनल एसपी अजय कुमार
  • एसडीएम ओरछा डॉ. सुमित गर्ग
  • तहसीलदार कोहकामेटा डॉ. अयाज हाशमी
  • जनपद सीईओ ओरछा श्री लोकेश चतुर्वेदी
    सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।


नक्सलियों की छाया से विकास की ओर

आदिंगपार और धुरबेड़ा जैसे गांवों में कलेक्टर का बाइक से पहुंचना केवल एक दौरा नहीं, बल्कि यह संदेश है कि शासन अब अंतिम छोर तक पहुंचने के लिए प्रतिबद्ध है।
जहां कभी डर, सन्नाटा और अविश्वास था, वहां अब संवाद, उम्मीद और विकास की बात हो रही है।

यह बदलाव बताता है कि नक्सलवाद सिमट रहा है और प्रशासन अपने कदम मजबूती से आगे बढ़ा रहा है।
अब ग्रामीणों को उम्मीद है कि मूलभूत सुविधाएं, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार उनके गांवों तक वास्तव में पहुंचेगा।

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