अबूझमाड़ में बदलाव की ऐतिहासिक दौड़

कभी हिंसा के रास्ते थे, अब शांति की पगडंडी पर — अबूझमाड़ पीस हाफ मैराथन 2026 में दौड़ेंगे 140 से अधिक पुनर्वासित माओवादी
नारायणपुर। 14 जनवरी 2026, नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ अंचल में शांति और परिवर्तन की नई तस्वीर उभर रही है। कभी हिंसा, हथियार और अशांति के पर्याय रहे पुनर्वासित माओवादी अब शांति, विकास और विश्वास का संदेश लेकर अबूझमाड़ पीस हाफ मैराथन 2026 में दौड़ने की तैयारी कर रहे हैं। लाइवलीहुड कॉलेज नारायणपुर में कौशल शिक्षा प्राप्त कर रहे 140 से अधिक पुनर्वासित माओवादियों ने बुधवार को 5 किलोमीटर अभ्यास दौड़ पूरी कर मैराथन की औपचारिक तैयारी शुरू कर दी।

लाइवलीहुड कॉलेज परिसर से शुरू हुई इस अभ्यास दौड़ के बाद सभी प्रतिभागियों ने मैराथन में भाग लेने के लिए ऑनलाइन पंजीयन भी कराया। मैराथन की तिथि घोषित होते ही ये पुनर्वासित माओवादी नियमित रूप से पीटी, योग और दौड़ का अभ्यास कर रहे हैं। बड़ी संख्या में पंजीयन इस बात का प्रमाण है कि संवाद, अवसर और सकारात्मक मंच मिलने पर बदलाव संभव है।
हथियारों से हटकर अब शांति की राह
31 जनवरी 2026 को आयोजित होने जा रही अबूझमाड़ पीस हाफ मैराथन के पांचवें संस्करण में एक ऐतिहासिक दृश्य देखने को मिलेगा। कभी जंगलों में हथियार लेकर हिंसा का रास्ता चुनने वाले नक्सली, पुनर्वास के बाद अब देश-विदेश से आए धावकों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर शांति और विकास का संदेश देते नजर आएंगे। यह दौड़ केवल खेल आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक पुनर्निर्माण और विश्वास बहाली का सशक्त प्रतीक बनकर उभरेगी।
वैश्विक मंच पर जाएगा शांति का संदेश
अबूझमाड़ पीस हाफ मैराथन का उद्देश्य क्षेत्र में स्थायी शांति, समावेशी विकास और युवाओं को सकारात्मक दिशा देना है। देश-विदेश से आने वाले धावकों की भागीदारी यह संदेश वैश्विक मंच तक पहुंचाएगी कि अबूझमाड़ अब हिंसा नहीं, बल्कि बदलाव और विकास की पहचान बन रहा है। प्रशासन की ओर से प्रतिभागियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और सुविधाओं को लेकर व्यापक तैयारियां की जा रही हैं।
कार्यक्रम में रहे अधिकारी व जवान मौजूद
इस अवसर पर डिप्टी कलेक्टर सुमीत गर्ग (जिला खेल अधिकारी), उप पुलिस अधीक्षक आशीष नेताम, नायब तहसीलदार विजय साहू (ओरछा) सहित मीडिया प्रतिनिधि, पुलिस अधिकारी व जवान तथा लाइवलीहुड कॉलेज का स्टाफ मौजूद रहा। कार्यक्रम में करीब 200 से अधिक आत्मसमर्पित माओवादी भी उपस्थित रहे, जिन्होंने शांति के इस नए सफर को अपनी भागीदारी से मजबूती दी।
अबूझमाड़ में यह दौड़ केवल किलोमीटर तय करने की नहीं, बल्कि हिंसा से विश्वास और अंधकार से उजाले की ओर बढ़ते कदमों की पहचान बन चुकी है।




