अबूझमाड़ पीस हाफ मैराथन : शांति, विकास और विश्वास की ऐतिहासिक दौड़
लाल आतंक की छाया से निकलकर नए भविष्य की ओर बढ़ता अबूझमाड़

(कैलाश सोनी) नारायणपुर। कभी नक्सलवाद और लाल आतंक के कारण देश-दुनिया में भय और अंधेरे की पहचान बना अबूझमाड़ अब शांति, विकास और भरोसे का प्रतीक बनकर उभर रहा है।
इसी परिवर्तन की सबसे सशक्त मिसाल बना अबूझमाड़ पीस हाफ मैराथन, जिसने अपने पांचवें संस्करण में एक बार फिर इतिहास रच दिया। हजारों कदमों की गूंज, उत्साह से भरी आंखें और आत्मविश्वास से लबरेज चेहरे—यह दृश्य केवल एक खेल आयोजन का नहीं, बल्कि पूरे इलाके के बदलते भविष्य का संदेश था।

नारायणपुर जिले के सुदूर अबूझमाड़ क्षेत्र में आयोजित इस मैराथन में बस्तर संभाग ही नहीं, बल्कि देश के विभिन्न राज्यों से आए धावकों ने भाग लिया। 21 किलोमीटर की इस शांति दौड़ में युवाओं, महिलाओं, सुरक्षाबलों, ग्रामीणों और विशेष वर्ग के प्रतिभागियों की भागीदारी ने आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया। मैराथन को छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। मुख्यमंत्री ने धावकों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि यह दौड़ केवल दूरी तय करने का माध्यम नहीं, बल्कि अबूझमाड़ के आत्मविश्वास, शांति और विकास की ओर बढ़ते कदमों का प्रतीक है।

इस अवसर पर वन मंत्री केदार कश्यप और प्रभारी मंत्री टंकराम वर्मा भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। अतिथियों ने एक स्वर में कहा कि अबूझमाड़ अब भय का नहीं, भरोसे और संभावनाओं का नाम बन रहा है। आयोजन स्थल पर मौजूद जनसमूह और धावकों के जोश ने यह साफ कर दिया कि अब यह इलाका पीछे मुड़कर नहीं, बल्कि आगे बढ़ने के संकल्प के साथ खड़ा है।
लाल गलियारे से शांति के मार्ग पर
अबूझमाड़ पीस हाफ मैराथन की शुरुआत वर्ष 2018-19 में तत्कालीन पुलिस अधीक्षक जितेंद्र शुक्ला की पहल पर हुई थी। उस समय उद्देश्य स्पष्ट था—नक्सलवाद और लाल गलियारे की नकारात्मक छवि को तोड़ते हुए अबूझमाड़ को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना। शुरुआती दौर में इसे लेकर शंकाएं थीं, लेकिन सुरक्षा बलों के निरंतर प्रयास, प्रशासन की दृढ़ इच्छाशक्ति और स्थानीय जनता के सहयोग ने इस आयोजन को जनआंदोलन में बदल दिया।
आज स्थिति यह है कि जिस क्षेत्र को कभी “नो-गो एरिया” कहा जाता था, वहां हजारों लोग शांति की दौड़ में शामिल हो रहे हैं। यह बदलाव यूं ही नहीं आया। सुरक्षाबलों के अदम्य साहस, नक्सल विरोधी अभियानों की सफलता और शासन की विकासोन्मुख नीतियों ने अबूझमाड़ की तस्वीर बदल दी है। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और संचार सुविधाओं के विस्तार ने ग्रामीणों के जीवन में नई उम्मीद जगाई है।
आत्मसमर्पण से विश्वास तक
इस वर्ष के आयोजन की सबसे खास और भावनात्मक झलक तब देखने को मिली, जब आत्मसमर्पित नक्सली भी इस मैराथन के सहभागी बने। कभी बंदूक के रास्ते भटके लोग आज शांति की दौड़ में कदम से कदम मिलाते दिखे। यह दृश्य न केवल अबूझमाड़, बल्कि पूरे देश के लिए संदेश था कि संवाद, विकास और विश्वास के रास्ते पर चलकर किसी भी क्षेत्र को हिंसा से बाहर निकाला जा सकता है।
मैराथन के दौरान स्थानीय ग्रामीणों ने जगह-जगह धावकों का स्वागत किया। पारंपरिक वेशभूषा, लोकनृत्य और ढोल-नगाड़ों की गूंज ने आयोजन को उत्सव का रूप दे दिया। महिलाओं और युवाओं की सक्रिय भागीदारी ने यह साबित किया कि अबूझमाड़ का समाज परिवर्तन को आत्मसात कर चुका है।
खेल से आगे, सामाजिक आंदोलन
अबूझमाड़ पीस हाफ मैराथन अब केवल एक खेल प्रतियोगिता नहीं रही। यह शांति, विकास और सामाजिक एकता का आंदोलन बन चुकी है। प्रशासन का मानना है कि इस तरह के आयोजन युवाओं को सकारात्मक दिशा देते हैं और उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने संबोधन में कहा कि अबूझमाड़ की यह दौड़ देश को यह संदेश देती है कि सरकार और जनता मिलकर चाहें तो सबसे कठिन परिस्थितियों को भी बदल सकती हैं। उन्होंने सुरक्षा बलों, प्रशासन और स्थानीय नागरिकों की सराहना करते हुए कहा कि आने वाले वर्षों में अबूझमाड़ को विकास के नए केंद्र के रूप में स्थापित किया जाएगा।
बदलती पहचान, नया आत्मविश्वास
मैराथन के सफल आयोजन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अबूझमाड़ अब अतीत की छाया में नहीं जी रहा। यहां के युवा शिक्षा, खेल और रोजगार के अवसरों की ओर बढ़ रहे हैं। सड़क और संचार नेटवर्क के विस्तार से बाहरी दुनिया से संपर्क बढ़ा है, जिससे निवेश और पर्यटन की संभावनाएं भी जन्म ले रही हैं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसे आयोजनों से न केवल क्षेत्र की छवि सुधरती है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिलती है। होटल, परिवहन, स्थानीय उत्पाद और सेवाओं को बढ़ावा मिलता है। इससे ग्रामीणों को रोजगार के नए अवसर मिलते हैं और उनका जीवन स्तर सुधरता है।
देश-दुनिया के पटल पर अबूझमाड़
अबूझमाड़ पीस हाफ मैराथन की गूंज अब राज्य की सीमाओं से बाहर निकल चुकी है। राष्ट्रीय स्तर पर इस आयोजन की चर्चा हो रही है और अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी इसे शांति स्थापना के मॉडल के रूप में देखा जा रहा है। यह मैराथन बताती है कि विकास केवल इमारतों से नहीं, बल्कि विश्वास और भागीदारी से आता है।
पांचवें संस्करण की सफलता के साथ ही यह आयोजन भविष्य की ओर नए संकल्प लेकर आगे बढ़ रहा है। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि आने वाले वर्षों में इसे और व्यापक रूप दिया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक लोग इस शांति दौड़ का हिस्सा बन सकें।
उम्मीदों की दौड़ जारी
अबूझमाड़ पीस हाफ मैराथन ने यह साबित कर दिया है कि परिवर्तन संभव है। जिस धरती ने कभी हिंसा का दर्द सहा, वही आज शांति और विकास की मिसाल बन रही है। हजारों धावकों के कदमों के साथ अबूझमाड़ का भविष्य भी तेज़ी से आगे बढ़ रहा है—एक ऐसे रास्ते पर, जहां डर नहीं, बल्कि भरोसा है; जहां अंधेरा नहीं, बल्कि उजाला है।
यह दौड़ खत्म नहीं हुई है, बल्कि अभी शुरू हुई है—शांति, विकास और विश्वास की एक लंबी, लेकिन मजबूत दौड़।




