
कैलाश सोनी
नारायणपुर, 16 जनवरी। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित और अति दुर्गम अबूझमाड़ क्षेत्र में शासन की योजनाओं को जमीनी हकीकत में बदलने का सशक्त संदेश उस वक्त देखने को मिला, जब नारायणपुर कलेक्टर नम्रता जैन ने सुरक्षा बलों के साथ बाइक से करीब 110 किलोमीटर का दुर्गम सफर तय किया। कच्चे रास्ते, जंगल, नदी–नालों को पार कर वे ग्राम ढोंढरबेड़ा, कुड़मेल और जाटलूर पहुँचीं, जहाँ शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं का प्रत्यक्ष निरीक्षण किया।

क्लासरूम से लेकर कच्ची सड़कों तक प्रशासन की मौजूदगी
अबूझमाड़ जैसे क्षेत्रों में, जहाँ आज भी सुविधाएँ चुनौती बनी हुई हैं, कलेक्टर का स्वयं मौके पर पहुँचना ग्रामीणों के लिए भरोसे का प्रतीक बना। आश्रमों में बच्चों के साथ बैठकर पढ़ाई देखना, ब्लैकबोर्ड पर सवाल हल कराते बच्चों को प्रोत्साहित करना और आंगनबाड़ी व बाजार स्थलों का निरीक्षण—यह सब इस बात का संकेत है कि प्रशासन अब फाइलों से निकलकर गांव की चौखट तक पहुँचा है।


बच्चों के साथ राष्ट्रगान, शिक्षा पर विशेष जोर
ग्राम कुड़मेल और जाटलूर के बालक आश्रमों में कलेक्टर ने बच्चों के साथ राष्ट्रगान गाया। जंगलों के बीच बसे इन गांवों में राष्ट्रगान की गूंज ने यह संदेश दिया कि अबूझमाड़ भी राष्ट्र की मुख्यधारा का हिस्सा है।
उन्होंने बच्चों से पढ़ाई की जानकारी ली, उपस्थिति, भोजन, स्वच्छता और पेयजल व्यवस्था का निरीक्षण किया तथा शिक्षकों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
यूनिफॉर्म, खेल सामग्री और स्वास्थ्य पर फोकस
जाटलूर में बच्चों को स्कूली यूनिफॉर्म वितरित करते हुए कलेक्टर ने कहा कि शिक्षा ही क्षेत्र के विकास की असली ताकत है।
बच्चों की मांग पर खेल सामग्री और जूतों की उपलब्धता का आश्वासन दिया गया। वहीं स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए मच्छरदानी के नियमित उपयोग के निर्देश भी दिए गए।
ग्रामीणों से सीधा संवाद, समस्याओं का मौके पर समाधान
कलेक्टर ने गांवों में महिलाओं, युवाओं और ग्रामीणों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं। ग्रामीणों ने गोटुल में शेड, बाउंड्रीवॉल, देवगुड़ी निर्माण, प्रधानमंत्री आवास, राशन दुकान संचालन और आंगनबाड़ी भवन निर्माण की मांग रखी।
कलेक्टर ने नियद नेल्ला नार योजना के तहत पात्र हितग्राहियों को शत-प्रतिशत लाभ दिलाने के निर्देश दिए।

नियद नेल्ला नार योजना को लेकर स्पष्ट संदेश
इस दौरे के दौरान कलेक्टर ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि दूरस्थ और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में योजनाओं के क्रियान्वयन में कोई कोताही न बरती जाए। सड़क, पेयजल, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए।

सुरक्षा के बीच संवेदनशील प्रशासन की तस्वीर
बाइक पर जंगल के रास्तों से गुजरती कलेक्टर, ग्रामीणों से संवाद करती तस्वीरें और बच्चों के बीच खड़ी प्रशासनिक टीम—ये दृश्य इस बात को दर्शाते हैं कि अबूझमाड़ में विकास अब केवल योजना नहीं, बल्कि जमीनी सच्चाई बन रहा है।

अबूझमाड़ में भरोसे की नई शुरुआत
कलेक्टर नम्रता जैन का यह दौरा केवल निरीक्षण नहीं, बल्कि शासन और जनता के बीच विश्वास की मजबूत कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। दुर्गमता को चुनौती मानकर नहीं, जिम्मेदारी समझकर किया गया यह भ्रमण अबूझमाड़ में विकास की नई इबारत लिखने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।



