अबूझमाड़ अब अंधकार नहीं, संभावनाओं की धरती
नक्सल छाया से विकास-पथ पर नारायणपुर का अबूझमाड़

पर्यटन, सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य से बदलेगा 4000 वर्ग किमी का भविष्य – केदार कश्यप
कैलाश सोनी | नारायणपुर
नारायणपुर। जिस का नाम दशकों तक नक्सल दहशत, दुर्गमता और विकास-विहीनता का पर्याय रहा, वही अबूझमाड़ अब विकास, भरोसे और संभावनाओं की नई कहानी लिखने लगा है। नारायणपुर के स्थानीय विधायक और छत्तीसगढ़ शासन के कैबिनेट मंत्री के निरंतर प्रयासों से लगभग 4000 वर्ग किलोमीटर में फैले इस दुर्गम अंचल के सुदूर गांवों तक केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाएं जमीन पर उतरने लगी हैं।
मंत्री केदार कश्यप का कहना है कि अबूझमाड़ के भीतर सड़क, सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वच्छता जैसी बुनियादी सुविधाओं की पहुंच ने स्थानीय जनजीवन को नई दिशा दी है। वर्षों से मुख्यधारा से कटे रहे गांवों में अब शासन की मौजूदगी स्पष्ट रूप से महसूस की जा रही है।
“अबूझमाड़ के दूरस्थ अंचलों तक योजनाएं पहुंच रही हैं”
केदार कश्यप ने कहा कि यह बदलाव केवल कागजी नहीं, बल्कि मैदानी स्तर पर दिखने वाला परिवर्तन है।
उन्होंने कहा—
“अबूझमाड़ के दूरस्थ अंचलों तक योजनाएं पहुंच रही हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और स्वच्छता के क्षेत्र में ठोस काम हुआ है। इसका सीधा लाभ ग्रामीणों को मिल रहा है और उनकी जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव आ रहा है।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र की मोदी सरकार और राज्य में मुख्यमंत्री के सुशासन में यह क्षेत्र अब विकास के नए आयाम गढ़ रहा है।
प्राकृतिक सौंदर्य से पर्यटन की ओर
अबूझमाड़ केवल संघर्ष की कहानी नहीं, बल्कि प्रकृति की अनुपम धरोहर भी है। मंत्री केदार कश्यप ने बताया कि कच्चापाल, हांदावाड़ा, फरसबेड़ा सहित कई जलप्रपात, झरने और नदियां अबूझमाड़ को पर्यटन की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध बनाती हैं।

इन स्थलों के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं, जो इस बात का संकेत हैं कि अबूझमाड़ पर्यटन मानचित्र पर उभरने को तैयार है।
उन्होंने कहा—
“हमारा लक्ष्य है कि अबूझमाड़ को एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाए, ताकि प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण हो और स्थानीय युवाओं को रोजगार मिले।”

365 दिन बहता आस्था का स्रोत
अबूझमाड़ के गारपा गांव में शिव मंदिर के समीप स्थित वह प्रसिद्ध जलस्रोत, जो साल के 365 दिन, 24 घंटे निर्बाध बहता रहता है, आज भी लोगों के लिए आस्था और जीवन का आधार बना हुआ है। यह जलधारा न सिर्फ धार्मिक महत्व रखती है, बल्कि इस क्षेत्र की प्राकृतिक विशिष्टता का जीवंत प्रमाण भी है।

नक्सल प्रभाव से विकास की ओर
जहां कभी बंदूक का कानून था, वहां अब सड़क, सुरक्षा कैंप और प्रशासनिक पहुंच दिखाई देने लगी है। विकास कार्यों के साथ-साथ पर्यटन की संभावनाएं खुलने से स्थानीय लोगों में भरोसा जगा है कि अब उनका इलाका स्थायी रूप से पिछड़ेपन से बाहर निकलेगा।
केदार कश्यप ने जनता से अपील की कि वे अपनी प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण करें और पर्यटन विकास में सक्रिय सहयोग दें। उन्होंने भरोसा दिलाया कि शासन स्तर पर हर संभव प्रयास किए जाएंगे, ताकि अबूझमाड़ छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना सके।
अबूझमाड़: भविष्य की नई पहचान
अबूझमाड़ का विकास केवल एक क्षेत्र का उत्थान नहीं, बल्कि आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक सशक्तिकरण की प्रक्रिया है।
यदि यह गति बनी रही, तो आने वाले वर्षों में अबूझमाड़ नक्सल दहशत की नहीं, बल्कि पर्यटन, समृद्धि और समावेशी विकास की मिसाल बनेगा।




