स्कूल कैईन्ता अभियान के तहत अप्रवेशी व शाला-त्यागी बच्चों के लिए ब्रिज कोर्स प्रशिक्षण सम्पन्न
22364 घरों का सर्वे, 793 बच्चों का नया प्रवेश – 10 गांवों में अतिरिक्त शालाओं का संचालन

नारायणपुर। कलेक्टर प्रतिष्ठा ममगाईं के निर्देशानुसार जिले में स्कूल कैईन्ता अभियान तेजी से संचालित किया जा रहा है। अभियान के तहत ग्राम पंचायतों एवं आश्रित गांवों में शिक्षकों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और बिहान समूह के सदस्यों द्वारा घर-घर सर्वे किया गया। कुल 22364 घरों के सर्वे में 1135 शाला-त्यागी और 1280 अप्रवेशी बच्चों की पहचान की गई।

पहचान के बाद पालकों की सहमति से गांव के आसपास स्थित विद्यालयों, छात्रावासों एवं आश्रमों में 705 अप्रवेशी तथा 88 शाला-त्यागी, कुल 793 बच्चों का पुनः प्रवेश कराया गया। वहीं, जहां दूरी या अन्य कारणों से बच्चों का विद्यालय जाना संभव नहीं था, वहां कलेक्टर के निर्देशानुसार 10 गांवों में अतिरिक्त शालाएं शुरू की गई हैं। जिला खनिज न्यास निधि से अतिथि शिक्षक एवं रसोइया मानदेय स्वीकृत कर वैकल्पिक व्यवस्था के तहत शालाओं का संचालन किया जा रहा है।
ब्रिज कोर्स से जुड़े महत्वपूर्ण पहलू
अभियान के तहत ब्रिज कोर्स का संचालन भी किया जा रहा है। इसमें बिहान समूह की शिक्षा सखियों द्वारा अप्रवेशी और शाला-त्यागी बच्चों को गांव में ही पढ़ाया जाएगा।
गांवों में 15 वर्ष से अधिक उम्र के बच्चों को उल्लास साक्षरता मिशन के माध्यम से साक्षर बनाया जाएगा, जिसके लिए बिहान की स्व-सहायता समूह सदस्य सक्रिय हैं।
15 से 18 वर्ष आयु वर्ग के शाला-त्यागी बच्चों के लिए ओपन स्कूल परीक्षा हेतु आवेदन फार्म भरवाए जा रहे हैं, ताकि वे पुनः शिक्षा की मुख्यधारा से जुड़ सकें।
दो दिवसीय ब्रिज कोर्स प्रशिक्षण सम्पन्न
अप्रवेशी और शाला-त्यागी बच्चों में आधारभूत साक्षरता, संख्याज्ञान व बुनियादी गणितीय कौशल विकसित करने के उद्देश्य से दो दिवसीय ब्रिज कोर्स प्रशिक्षण जिला पंचायत नारायणपुर के सभा कक्ष में आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में बिहान (शिक्षा सखी) के अंतर्गत गठित स्व-सहायता समूहों की सदस्याओं ने भाग लिया।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत आकांक्षा शिक्षा खलखो, सहायक जिला परियोजना अधिकारी (समग्र शिक्षा), सहायक जिला परियोजना अधिकारी (साक्षरता), डीपीएम एनआरएलएम नारायणपुर एवं शिक्षार्थ के कर्मचारी उपस्थित रहे।
स्कूल कैईन्ता अभियान के माध्यम से शासन का लक्ष्य अधिक से अधिक बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना और जिले में साक्षरता व शैक्षणिक गुणवत्ता को मजबूत करना है।




