नारायणपुर

अबूझमाड़ में शांति की निर्णायक दस्तक

नक्सलियों की अघोषित राजधानी कुतुल के भीतर मन्दोड़ा में तीसरा सुरक्षा व जन-सुविधा कैंप स्थापित

‘माड़ बचाओ’ अभियान के तहत नारायणपुर पुलिस, डीआरजी व आईटीबीपी का बड़ा रणनीतिक कदम

नारायणपुर। अबूझमाड़ को शांत, उन्नत और नक्सलमुक्त बनाने की दिशा में नारायणपुर पुलिस ने एक और निर्णायक कदम बढ़ाते हुए नक्सलियों की अघोषित राजधानी माने जाने वाले कुतुल क्षेत्र के भीतर ग्राम मन्दोड़ा में तीसरे नवीन सुरक्षा एवं जन-सुविधा कैंप की स्थापना कर दी है। यह कैंप ‘माड़ बचाओ’ अभियान के तहत घोर नक्सल प्रभावित क्षेत्र में खोला गया है, जिससे अबूझमाड़ में स्थायी शांति की राह और मजबूत हुई है।

वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में संचालित इस अभियान का उद्देश्य न केवल नक्सल विरोधी कार्रवाई को प्रभावी बनाना है, बल्कि अबूझमाड़ के अंदरूनी गांवों तक सड़क, पुल-पुलिया, शिक्षा, स्वास्थ्य और संचार जैसी बुनियादी सुविधाएं पहुंचाना भी है। लगातार नए कैंप स्थापित कर पुलिस और सुरक्षा बल विकास कार्यों के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार कर रहे हैं।

कोहकामेटा क्षेत्र में रणनीतिक कैंप
थाना कोहकामेटा क्षेत्रांतर्गत ग्राम मन्दोड़ा में स्थापित यह नवीन कैंप नक्सल विरोधी अभियानों के साथ-साथ कोहकामेटा–कच्चापाल–कुतुल–कोड़नार–धोबे एक्सिस तक सड़क निर्माण कार्यों को सुरक्षा प्रदान करेगा। 28 दिसंबर 2025 को खोले गए इस कैंप से क्षेत्र में विकास कार्यों को गति मिलने की उम्मीद है।

मन्दोड़ा कैंप जिला मुख्यालय नारायणपुर से 62 किलोमीटर, थाना कोहकामेटा से 34 किलोमीटर, कच्चापाल से 25 किलोमीटर, कुतुल से 18 किलोमीटर, कोडनार से 12 किलोमीटर तथा आदिनपार से 6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। कैंप की स्थापना से ग्रामीणों में सुरक्षा और विश्वास का माहौल बना है।

आसपास के गांवों को मिलेगा विकास का लाभ
मन्दोड़ा में कैंप खुलने से कुमनार, बोयेर, कुमम, गोंडेकोट और मन्दोड़ा सहित आसपास के इलाकों में सड़क, पुल-पुलिया, शिक्षा, चिकित्सा, मोबाइल नेटवर्क कनेक्टिविटी और अन्य मूलभूत सुविधाओं का तेजी से विस्तार होगा। सुरक्षा बलों की मौजूदगी में अब विकास योजनाएं बिना बाधा आम जनता तक पहुंच सकेंगी।

2025 में अबूझमाड़ में सुरक्षा नेटवर्क का बड़ा विस्तार
नारायणपुर पुलिस ने वर्ष 2025 में नक्सलियों के गढ़ माने जाने वाले क्षेत्रों में लगातार कैंप स्थापित कर सुरक्षा घेरा मजबूत किया है। इनमें कुतुल, कोडलियर, बेडमाकोटी, पदमकोट, कान्दुलपार, नेलांगूर, पांगूड, रायनार, एडजुम, ईदवाया, आदेर, कुड़मेल, कोंगे, सितरम, तोके, जाटलूर, धोबे, डोडीमरका, पदमेटा, लंका, परियादी, काकुर, बालेबेड़ा, कोडेनार, कोड़नार, आदिनपार और मन्दोड़ा शामिल हैं।

वरिष्ठ अधिकारियों का नेतृत्व, बलों की अहम भूमिका
इस अभियान में पुलिस महानिरीक्षक बस्तर रेंज पी. सुन्दराज, पुलिस उप महानिरीक्षक कांकेर रेंज अमित कांबले (भा.पु.से.), आईटीबीपी के उप महानिरीक्षक संजीव कुमार, पुलिस अधीक्षक नारायणपुर रोबिनसन गुरिया के मार्गदर्शन में कार्य किया गया।
साथ ही 16वीं वाहिनी CAF, आईटीबीपी की 53वीं, 45वीं, 41वीं और 29वीं वाहिनी, नारायणपुर डीआरजी एवं बस्तर फाइटर्स की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

अबूझमाड़ में एक के बाद एक खुलते सुरक्षा कैंप यह संकेत दे रहे हैं कि नक्सल हिंसा के अंधेरे से निकलकर यह इलाका शांति और विकास की ओर तेजी से बढ़ रहा है। मन्दोड़ा कैंप की स्थापना को अबूझमाड़ के इतिहास में शांति की दिशा में एक निर्णायक अध्याय के रूप में देखा जा रहा है।

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