अबूझमाड़ के बच्चों को मिला विकास का दर्शन, शिक्षा से जुड़कर गढ़ेंगे भविष्य

नारायणपुर, 30 दिसंबर। नक्सल प्रभावित अबूझमाड़ अंचल में अब बदलाव की बयार साफ नजर आने लगी है। बंदूक और हिंसा की छाया में लंबे समय तक पिछड़े रहे इस क्षेत्र के बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने और विकसित भारत की अवधारणा से परिचित कराने की दिशा में 45वीं वाहिनी, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल (आईटीबीपी) द्वारा सराहनीय पहल की गई। इसी क्रम में अबूझमाड़ क्षेत्र के बच्चों के लिए “शैक्षणिक एवं जागरूकता भ्रमण” कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

इस भ्रमण का उद्देश्य बच्चों को देश के विकास, शांति, शिक्षा और राष्ट्रनिर्माण की प्रक्रिया से जोड़ना था, ताकि वे अपने भविष्य को स्वयं नई दिशा दे सकें। कार्यक्रम के माध्यम से बच्चों में आत्मविश्वास, सकारात्मक सोच और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया।
20 बच्चों ने लिया शैक्षणिक भ्रमण में हिस्सा
शैक्षणिक एवं जागरूकता भ्रमण में कुल 20 बच्चों ने भाग लिया, जिनमें 10 बालक एवं 10 बालिकाएं शामिल थीं। बच्चों को क्षेत्र के विभिन्न विकासात्मक पहलुओं की जानकारी दी गई और यह बताया गया कि शिक्षा किस प्रकार व्यक्तिगत जीवन के साथ-साथ पूरे अबूझमाड़ क्षेत्र की तस्वीर बदल सकती है। इस दौरान बच्चों ने नई जगहें देखीं और सुरक्षा बलों की कार्यप्रणाली को भी समझा।
छोटेडोंगर सीओबी में हुआ कार्यक्रम का समापन
इस प्रेरणादायी यात्रा का समापन छोटेडोंगर सीओबी में किया गया। यहां आयोजित समापन कार्यक्रम में 45वीं वाहिनी के सेकंड इन कमांडेंट श्री प्रकाश भूषण झा ने सभी बच्चों का आत्मीय स्वागत किया। उन्होंने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि आज वे सीखने आए हैं और यही सीख आने वाले समय में अबूझमाड़ को बदलने का आधार बनेगी।
उन्होंने अपने संदेश में कहा—
“बंदूक नहीं, किताब ही इस क्षेत्र का भविष्य लिखेगी। आज आप जो ज्ञान अर्जित कर रहे हैं, वही कल अबूझमाड़ को नई पहचान देगा।”
कलम से बदलेगी किस्मत
समारोह के दौरान सभी प्रतिभागी बच्चों को पेन एवं डायरी भेंट की गई, जिन पर अंकित संदेश था—
“बदलता अबूझमाड़, अपना परिवार।”
श्री झा ने बच्चों को प्रेरित करते हुए कहा—
“यही कलम आपकी और अबूझमाड़ की किस्मत बदलेगी। आपका ईमानदार प्रयास ही अबूझमाड़ के विकास और नक्सल उन्मूलन की सबसे बड़ी ताकत बनेगा।”
शिक्षा बढ़ेगी तो हिंसा घटेगी
कार्यक्रम के दौरान एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने भी बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि बच्चे ही अबूझमाड़ का भविष्य हैं। उन्होंने कहा कि जब शिक्षा का स्तर बढ़ेगा, तो हिंसा और अस्थिरता अपने आप पीछे हटेगी और क्षेत्र विकास की राह पर आगे बढ़ेगा।
आईटीबीपी के प्रयासों की सराहना
कार्यक्रम के अंत में बच्चों और क्षेत्रवासियों ने आईटीबीपी द्वारा किए जा रहे मानवता-प्रधान और राष्ट्रनिर्माण से जुड़े प्रयासों की सराहना की। ग्रामीणों ने भरोसा दिलाया कि अबूझमाड़ को विकसित, शांत और नक्सल-मुक्त बनाने के लिए वे सुरक्षा बलों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहेंगे।
दूरदर्शी नेतृत्व को मिला सम्मान
इस संपूर्ण शैक्षणिक एवं जागरूकता भ्रमण कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए 45वीं वाहिनी के कमांडेंट श्री राजीव गुप्ता के दूरदर्शी नेतृत्व और मार्गदर्शन के प्रति आभार व्यक्त किया गया। अधिकारियों ने बताया कि भविष्य में भी इस तरह के कार्यक्रम आयोजित कर अबूझमाड़ के बच्चों को शिक्षा और विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जाता रहेगा।




