नारायणपुर पुलिस ने बनाया इतिहास ओरछा–आदेर मार्ग से बेदरे बार्डर “लंका” तक पहुँची सड़क 30 से अधिक गाँवों के लिए खुला विकास का नया द्वार

नारायणपुर। अबूझमाड़ के भीतरी इलाकों में पहली बार सड़क कनेक्टिविटी पहुँचने के साथ ही बस्तर के घोर नक्सल प्रभावित क्षेत्र लंका में विकास की रोशनी जगमगाने लगी है। नारायणपुर पुलिस ने ओरछा–आदेर मार्ग होते हुए बेदरे (जिला बीजापुर) की सीमा पर बसे लंका गांव तक सड़क मार्ग जोड़कर वह काम पूरा कर दिया है, जो वर्षों से केवल योजनाओं और फाइलों तक सीमित था। सड़क बनने के बाद अब यहां मोबाइल नेटवर्क, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य जनसुविधाओं के विस्तार का रास्ता भी साफ हो गया है। हजारों ग्रामीण अब सीधे सरकारी योजनाओं से जुड़ेगे।

लंका में नया सुरक्षा व जनसुविधा कैंप, ग्रामीणों में उत्साह
माड़ बचाव अभियान के तहत थाना ओरछा क्षेत्र के ग्राम लंका में नारायणपुर पुलिस, डीआरजी और आईटीबीपी 44वीं बटालियन ने नया सुरक्षा एवं जन सुविधा कैंप स्थापित किया है। यह इलाका लंबे समय तक माओवादियों का प्रभाव क्षेत्र रहा है, ऐसे में सुरक्षा बलों का स्थायी डेरा जमाना स्थानीय ग्रामीणों के लिए बड़ी राहत का कारण बना है।
लंका इंद्रावती नदी के किनारे बसा दुर्गम गांव है। यहां तक पहुँचना पहले बेहद कठिन था, लेकिन अब सड़क पहुँचने से सुरक्षा बलों और विकास विभागों की गतिविधियाँ तेज होंगी। ग्रामीण अब खुलकर सरकारी योजनाओं में भागीदारी कर पाएंगे।
दूर–दूर बसे गांवों तक पहुँचेगी मोबाइल, सड़क और स्वास्थ्य सुविधाएँ
नए कैंप के स्थापित होने से अंगमेटा, कुमरमेटा, कवंडे, पुसलंका, बुरी, जपमरका सहित 30 से अधिक गांवों में सड़क निर्माण, पुल-पुलिया, शिक्षा, चिकित्सा और मोबाइल नेटवर्क कनेक्टिविटी जैसी मूलभूत सुविधाओं का विस्तार तेज गति से होगा। सुरक्षा बलों की मौजूदगी के कारण अब निर्माण कार्यों में आने वाली बाधाएँ भी कम होंगी।
ग्राम लंका जिला मुख्यालय नारायणपुर से 120 किमी, ओरछा से 47 किमी, आदेर से 36 किमी, कुड़मेल से 21 किमी, जाटलूर से 20 किमी, डोडीमरका से 12 किमी और पदमेटा से 6 किमी दूर स्थित है। इतने कठिन मार्ग के बावजूद सुरक्षा बलों ने यहां कैंप स्थापित कर विकास के दरवाजे खोल दिए हैं।
2025 में अबूझमाड़ के भीतर लगातार बढ़ रही पुलिस की मौजूदगी
नारायणपुर पुलिस ने वर्ष 2025 में नक्सलियों के कई पारंपरिक आश्रय स्थलों—कुतुल, कोडलियर, बेडमाकोटी, पदमकोट, कान्दुलपार, नेलांगूर, पांगूड, रायनार, एडजुम, ईदवाया, आदेर, कुड़मेल, कोंगे, सितरम, तोके, जाटलूर, धोबे, डोडीमरका, पदमेटा और अब लंका—में लगातार नए कैंप खोले हैं। इससे नक्सलियों के प्रभाव में कमी आई है और ग्रामीणों का विश्वास सुरक्षा बलों के प्रति बढ़ा है।
अभियान में वरिष्ठ अधिकारियों की प्रमुख भूमिका
लंका में नया कैंप स्थापित करने के अभियान में बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक पी. सुन्दराज, कांकेर रेंज के पुलिस उप महानिरीक्षक अमित कांबले, नारायणपुर पुलिस अधीक्षक रोबिनसन गुरिया, आईटीबीपी 44वीं वाहिनी कमांडेंट मुकेश कुमार दसमाना, आईटीबीपी टू-आईसी पीपी सिद्दकी, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अक्षय सबद्रा, अजय कुमार, सुशील कुमार नायक, उप पुलिस अधीक्षक अविनाश कंवर, कुलदीप बंजारे और अजय कुमार सिंह के निर्देशन में सुरक्षा बलों—डीआरजी, बस्तर फाइटर्स तथा आईटीबीपी की 27वीं, 38वीं, 40वीं और 44वीं वाहिनी—ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
आने वाले दिनों में लंका व आसपास के गांवों में दिखेगा बड़ा बदलाव
सड़क और सुरक्षा मिलने के बाद अबूझमाड़ के इस भीतरी हिस्से में सरकारी योजनाओं का तेजी से क्रियान्वयन होगा। लंबे समय से विकास से दूर रहे ग्रामीण अब स्वास्थ्य, शिक्षा, संचार और आवागमन जैसी मूलभूत सुविधाओं से जुड़ पाएंगे।
लंका में सुरक्षा कैंप की स्थापना न केवल नक्सल प्रभावित अबूझमाड़ में सुरक्षा का मजबूत संदेश है, बल्कि यह बस्तर के पूर्ण विकास की दिशा में उठाया गया ऐतिहासिक कदम भी है।




