नारायणपुर

अबूझमाड़ के ‘‘कोंगे’’ में खुला नया पुलिस कैंप, माओवादियों के सेफ जोन तक पहुँची पुलिस

ग्रामीणों ने लिया नक्सलवाद खत्म करने का संकल्प

नारायणपुर। अबूझमाड़ के घोर नक्सल प्रभावित क्षेत्र ‘‘कोंगे’’ में नारायणपुर पुलिस और बीएसएफ की संयुक्त टीम ने सोमवार को नया सुरक्षा एवं जन सुविधा कैंप स्थापित किया। यह वही इलाका है जिसे माओवादी संगठन का ‘‘सेफ जोन’’ माना जाता था। इस कदम को अबूझमाड़ में नक्सल उन्मूलन अभियान की बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।

कोंगे में स्थापित यह नवीन पुलिस कैंप न केवल सुरक्षा बलों की पहुंच को गहराई तक सुनिश्चित करेगा, बल्कि क्षेत्र के ग्रामीणों के लिए विकास की नई राह भी खोलेगा। यह अबूझमाड़ क्षेत्र में एक साल के भीतर खुला 13वां पुलिस और जन सुविधा कैंप है।

ग्रामीणों में सुरक्षा का विश्वास, विकास की उम्मीद
कैंप स्थापना के बाद ग्रामीणों ने खुले तौर पर कहा कि अब वे नक्सलियों के डर से मुक्त जीवन जी सकेंगे। इस अवसर पर आसपास के गांवों — कोरोनार, परलकोट, सीतराम, छिंदपदर और वाला — से बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। ग्रामीणों ने पुलिस अधीक्षक रॉबिनसन गुड़िया (भा.पु.से.) के सामने बिजली, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं की मांग रखी।
एसपी गुड़िया ने उन्हें भरोसा दिलाया कि इन सभी सुविधाओं को शीघ्र पूरा कराया जाएगा। साथ ही ‘‘नियद नेल्लानार’’ योजना के अंतर्गत ‘‘जन समस्या निवारण शिविर’’ आयोजित करने की घोषणा भी की गई।

नक्सलवाद के खिलाफ ग्रामीणों का संकल्प
कोंगे और आसपास के गांवों के लोगों ने माओवादियों की हिंसा और अत्याचारों के खिलाफ खुलकर आवाज उठाई। उन्होंने नक्सलवाद को समाप्त करने और माओवादियों को सहयोग न करने का संकल्प लिया।
ग्रामीणों ने बताया कि पुलिस कैंप खुलने से अब वे अपने बच्चों की पढ़ाई, खेती-किसानी और व्यापार निर्भीक होकर कर पाएंगे।

208 नक्सलियों ने त्यागा हथियार
नारायणपुर पुलिस के अनुसार, वर्ष 2024–25 के दौरान अबूझमाड़ क्षेत्र में 208 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है। पुलिस और सुरक्षा बलों की बढ़ती उपस्थिति और विकास कार्यों की रफ्तार से प्रभावित होकर लोग नक्सली विचारधारा को त्याग रहे हैं।
इसी अवधि में 99 माओवादी मुठभेड़ों में मारे गए और 117 को गिरफ्तार किया गया।

विकास की दिशा में नया कदम
नवीन पुलिस कैंप कोंगे थाना सोनपुर से 30 किलोमीटर, कंदुलपार से 11 किलोमीटर और पांगुड से लगभग 4 किलोमीटर भीतर स्थित है।
कैंप की स्थापना से इस इलाके में सड़क, पुल-पुलिया, शिक्षा, स्वास्थ्य और मोबाइल नेटवर्क जैसी सुविधाओं का विस्तार होगा। अबूझमाड़ के अंदरूनी गांवों तक प्रशासन की पहुंच बढ़ेगी, जिससे शासन की योजनाएं सीधे ग्रामीणों तक पहुंच सकेंगी।

‘‘माड़ बचाव अभियान’’ के तहत लगातार हो रही प्रगति
पुलिस अधीक्षक रॉबिनसन गुड़िया ने बताया कि वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में नारायणपुर पुलिस लगातार ‘‘माड़ बचाव अभियान’’ चला रही है। इस अभियान के तहत नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में नए कैंप, सड़क निर्माण और जन सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है।
वर्ष 2025 में ही पुलिस ने नक्सलियों के गढ़ माने जाने वाले कुतुल, कोडलियर, बेडमाकोटी, पदमकोट, कान्दुलपार, नेलांगूर, पांगूड, रायनार, एडजुम, ईदवाया, आदेर, कुड़मेल और कोंगे जैसे इलाकों में कैंप खोले हैं।

वरिष्ठ अधिकारियों का नेतृत्व
कोंगे कैंप की स्थापना में पुलिस और अर्धसैनिक बलों की संयुक्त टीमों की बड़ी भूमिका रही। इस कार्रवाई का नेतृत्व
श्री पी. सुन्दराज (पुलिस महानिरीक्षक, बस्तर रेंज), श्री अमित कांबले (उप महानिरीक्षक, कांकेर रेंज), श्री रॉबिनसन गुड़िया (पुलिस अधीक्षक, नारायणपुर)
के साथ-साथ बीएसएफ 129वीं वाहिनी के कमांडेंट संजय सिंह ने किया।
टीम में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अक्षय सबद्रा, अजय कुमार, सुशील कुमार नायक, ऐश्वर्य चंद्राकर, डेप्युटी कमांडेंट दिगंबर सिंह चौहान, उप पुलिस अधीक्षक लौकेश बंसल, कुलदीप बंजारे, और असिस्टेंट कमांडेंट राकेश सेन्चा एवं विजय सिंह रावत शामिल रहे।

अबूझमाड़ में नई उम्मीद
कोंगे में स्थापित यह कैंप केवल सुरक्षा की दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन का भी प्रतीक बनकर उभरेगा।
स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर, महिलाओं को आत्मनिर्भरता के साधन और बच्चों को शिक्षा की बेहतर सुविधा मिलने की संभावना बढ़ेगी।
पुलिस और जनता के बीच संवाद की नई शुरुआत से अबूझमाड़ में शांति और विकास की नई कहानी लिखी जा रही है।

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