अबूझमाड़ के एडजूम में खुला नया सुरक्षा एवं जन सुविधा कैम्प

माड़ बचाव अभियान : अबूझमाड़ के एडजूम में खुला नया सुरक्षा एवं जन सुविधा कैम्प
ग्रामीणों में उत्साह, नक्सली प्रताड़ना से मिलेगी निजात
नारायणपुर। नक्सलवाद से जूझ रहे अबूझमाड़ क्षेत्र में ‘‘माड़ बचाव अभियान’’ के तहत नारायणपुर पुलिस और आईटीबीपी की संयुक्त पहल से सोमवार को थाना ओरछा अंतर्गत ग्राम एडजूम में नवीन सुरक्षा एवं जन सुविधा कैम्प स्थापित किया गया। यह एक वर्ष के भीतर खोला गया 16वां कैम्प है।
कैम्प स्थापना को लेकर ग्रामीणों में उत्साह का माहौल रहा। उन्होंने नक्सलियों द्वारा मारे गये साथियों को याद कर उनकी प्रताड़ना को व्यक्त किया और पुलिस-प्रशासन के इस कदम का स्वागत किया।
ग्रामीणों से संवाद, समस्याओं का समाधान
कैम्प के शुभारंभ अवसर पर पुलिस अधीक्षक रॉबिनसन गुड़िया (भा.पु.से.) सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। इस दौरान एडजूम, दुलूर, इर्दवाया सहित आसपास के गांवों से आये ग्रामीणों से सीधा संवाद किया गया। ग्रामीणों ने बिजली, नल-जल, शिक्षा, स्वास्थ्य और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं की मांग रखी। अधिकारियों ने शीघ्र समाधान का आश्वासन देते हुए ‘‘जन समस्या निवारण शिविर’’ आयोजित करने की जानकारी दी। साथ ही नारायणपुर से बेड़माकोठी तक जल्द बस सेवा शुरू करने की घोषणा की गई।
नक्सलवाद से मुक्ति की उम्मीद
ग्रामीणों ने कहा कि अब तक वे भय और प्रताड़ना की जिंदगी जी रहे थे। कैम्प खुलने से सुरक्षा का वातावरण बनेगा और वे खुले मन से जीवन जी सकेंगे। नक्सल समर्थक भी पुलिस की पहल से प्रभावित होकर आत्मसमर्पण कर रहे हैं। वर्षभर में अब तक 164 माओवादी नक्सल विचारधारा त्यागकर मुख्यधारा में लौटे हैं।
विकास कार्यों को मिलेगी गति
एडजूम कैम्प की स्थापना से अबूझमाड़ में सड़क, पुल-पुलिया, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और मोबाइल नेटवर्क जैसी बुनियादी सुविधाओं का तेजी से विस्तार होगा। सुरक्षा बलों की निगरानी में विकास कार्य सुचारू रूप से पूरे हो सकेंगे।
पुलिस और सुरक्षा बलों की भूमिका
नवीन कैम्प की स्थापना में नारायणपुर डीआरजी, बस्तर फाइटर और आईटीबीपी की 38वीं, 40वीं और 29वीं वाहिनी का विशेष योगदान रहा। वरिष्ठ अधिकारियों पुलिस महानिरीक्षक बस्तर रेंज पी. सुन्दराज और पुलिस उपमहानिरीक्षक कांकेर रेंज अमित कांबले के मार्गदर्शन में यह महत्वपूर्ण कदम उठाया गया।
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि यह पहल नक्सल उन्मूलन की दिशा में निर्णायक साबित होगी और मार्च 2026 तक अबूझमाड़ को नक्सलमुक्त बनाने के लक्ष्य को गति मिलेगी।




