छत्तीसगढ़ की एनएचएम महिला कर्मियों ने प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री को भेजी राखी, नियमितिकरण और वेतन वृद्धि की लगाई गुहार

15 अगस्त तक मांगे नहीं मानी गईं तो 18 अगस्त से अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी
नारायणपुर।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के अंतर्गत कार्यरत महिला कर्मचारियों ने इस वर्ष रक्षाबंधन को एक अनोखे और संवेदनशील अंदाज में मनाया है। जिले की एनएचएम महिला कर्मियों ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय को राखी भेजते हुए एक भावनात्मक अपील की है। इस राखी के साथ उन्होंने नियमितिकरण, लंबित वेतन वृद्धि और 10 सूत्रीय मांगों को लेकर पत्र के माध्यम से अपनी व्यथा व्यक्त की है।

एनएचएम महिला कर्मचारियों ने उपहार के रूप में अपने सुरक्षित भविष्य की मांग की है। पत्र में लिखा गया है कि पूरे प्रदेश के 16 हजार एनएचएम कर्मचारी वर्षों से अस्थायी सेवा में रहते हुए भी पूरी निष्ठा, ईमानदारी और सेवाभाव से स्वास्थ्य सुविधाएं दे रहे हैं। कोरोना काल से लेकर ग्रामीण अंचलों तक की स्वास्थ्य सेवाएं सुचारु रूप से चलाने में इन कर्मियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, परंतु इसके बावजूद उन्हें अभी तक नियमित कर्मचारी का दर्जा नहीं मिल पाया है।
रक्षाबंधन पर भावनात्मक अपील
जिला इकाई नारायणपुर की एनएचएम महिला कर्मियों ने इस रक्षाबंधन पर प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री से भाई के रूप में अपने अधिकारों की रक्षा करने की उम्मीद जताई है। उनकी प्रमुख मांगें हैं – सेवा की नियमितिकरण, लंबित 27% वेतन वृद्धि की स्वीकृति, महंगाई भत्ते की व्यवस्था, समान कार्य के लिए समान वेतन, मातृत्व अवकाश, सेवानिवृत्ति लाभ, स्वास्थ्य बीमा, स्थायी पदों पर नियुक्ति, स्थानांतरण नीति और प्रशिक्षण के लिए समुचित प्रावधान।
उनका कहना है कि प्रदेशभर में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाए रखने में एनएचएम कर्मियों की भूमिका अहम रही है, परंतु जब उन्हें स्वयं के जीवन और भविष्य की चिंता सता रही हो, तो यह न केवल कर्मचारियों के लिए चिंता का विषय है, बल्कि शासन-प्रशासन के लिए भी गंभीर प्रश्न है।
15 अगस्त तक मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन
एनएचएम कर्मचारी संघ ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यदि 15 अगस्त 2025 तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो 18 अगस्त से प्रदेश भर के 16 हजार एनएचएम कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे। आंदोलन का यह स्वरूप इतना व्यापक होगा कि ग्रामीण क्षेत्रों की प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं से लेकर जिला अस्पतालों की आपातकालीन व्यवस्था तक प्रभावित हो सकती है।
कर्मचारियों ने यह भी चेतावनी दी है कि इस आंदोलन की वजह से स्वास्थ्य तंत्र चरमरा जाएगा और इसके लिए जिम्मेदार शासन-प्रशासन ही होगा। उन्होंने सरकार से अपील की है कि वे संवेदनशीलता के साथ इस मुद्दे पर विचार करें और जल्द से जल्द समाधान निकालें, जिससे प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था बाधित न हो और कर्मचारियों को उनका हक मिल सके।
कोविड काल में निभाई थी अहम भूमिका
एनएचएम कर्मचारी संघ की ओर से यह भी याद दिलाया गया कि जब पूरा देश कोरोना जैसी महामारी से जूझ रहा था, उस समय एनएचएम कर्मचारियों ने जान की परवाह किए बिना दिन-रात सेवा दी। ग्रामीण इलाकों में जाकर टेस्टिंग, वैक्सीनेशन, जागरूकता अभियान जैसे कार्यों को जिम्मेदारी से निभाया।
अब जबकि स्थिति सामान्य हो रही है, तब इन कर्मियों को अनदेखा करना सरकार की संवेदनहीनता को दर्शाता है। कई बार मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपे गए, वार्ताएं हुईं, परंतु कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है।
राजनीतिक और सामाजिक संगठनों से भी समर्थन की मांग
एनएचएम महिला कर्मियों ने सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों और राजनीतिक दलों से भी अपील की है कि वे इस मुद्दे पर सहयोग करें और कर्मचारियों के साथ खड़े हों। उनका मानना है कि स्वास्थ्य जैसे बुनियादी सेवा क्षेत्र में काम कर रहे कर्मियों को यदि न्याय नहीं मिला, तो यह पूरे तंत्र के लिए दुर्भाग्यपूर्ण होगा।
राखी से जुड़े भावनात्मक संदेश में यह भी लिखा गया –
“भाई मोदी और भाई विष्णु देव साय जी, जब बहन संकट में होती है तो भाई उसकी रक्षा करता है। आज हम बहनें आपके भरोसे हैं, हमें अस्थायी जीवन से मुक्ति दिलाकर स्थायी सेवा का सम्मान दिलाएं।”
संघ ने शासन को दी अंतिम चेतावनी
एनएचएम कर्मचारी संघ ने दो टूक शब्दों में कहा है कि यदि अब भी सरकार ने उन्हें गंभीरता से नहीं लिया, तो आंदोलन के लिए उन्हें मजबूर होना पड़ेगा। 18 अगस्त से जो हड़ताल शुरू होगी, वह अनिश्चितकालीन होगी और स्वास्थ्य सेवाओं को होने वाली हानि की जिम्मेदारी शासन की होगी।
एनएचएम महिला कर्मियों की यह पहल न केवल उनके अधिकारों की लड़ाई है, बल्कि यह पूरे प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को दुरुस्त करने की पुकार भी है। अब देखना होगा कि क्या रक्षाबंधन के इस संवेदनशील उपहार पर सरकार संजीदगी से विचार करती है या फिर प्रदेश को एक और बड़े आंदोलन का सामना करना पड़ेगा।




