अबूझमाड़ से निकल रही सफलता की किरणें

BSF की पहल से बदली युवाओं की तस्वीर, नौकरी की राह पर बढ़ रहे कदम…
नारायणपुर।
नक्सल प्रभावित अबूझमाड़ की वीरानी और भय के बीच अब उम्मीदों की नई कहानी लिखी जा रही है। जहां कभी युवा बंदूक थामने को मजबूर हो जाते थे, वहीं आज उनके हाथों में नियुक्ति पत्र है और आंखों में सपनों की चमक। यह सकारात्मक बदलाव लाने में सीमा सुरक्षा बल (BSF) की 135वीं बटालियन ने अहम भूमिका निभाई है।

बीएसएफ ने पिछले एक वर्ष से नारायणपुर और अबूझमाड़ क्षेत्र के युवक-युवतियों को सुरक्षाबलों की भर्ती के लिए न केवल शारीरिक बल्कि लिखित परीक्षा की तैयारी भी कराई। नतीजा यह रहा कि तेलसी कैंप में प्रशिक्षित 80 युवाओं में से 7 युवतियां नगर सेना में चयनित हुईं और 35 युवाओं ने जिला पुलिस बल की शारीरिक परीक्षा सफलता पूर्वक पास की। यह उपलब्धि पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है।
सफल अभ्यर्थियों को सम्मानित करते हुए बीएसएफ कमांडेंट नवल सिंह ने कहा—
“कठिन परिस्थितियों और संसाधनों की कमी के बावजूद युवाओं ने जो मुकाम हासिल किया है, वह सराहनीय है। इनकी सफलता अन्य युवाओं को भी प्रेरणा देगी।”
प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं ने बीएसएफ के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यहां उन्हें केवल फिजिकल ट्रेनिंग नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, अनुशासन और लिखित परीक्षा की तैयारी का अवसर मिला। पहले जहां वे खुद को कमजोर समझते थे, वहीं अब आत्मनिर्भरता और नौकरी की राह पर आगे बढ़ रहे हैं।
बीएसएफ जवानों का कहना है कि अबूझमाड़ के युवाओं में साहस और ऊर्जा की कोई कमी नहीं है, बस उन्हें सही दिशा और मार्गदर्शन चाहिए।
यह पहल केवल रोजगार का साधन नहीं, बल्कि नक्सल प्रभावित क्षेत्र में स्थायी शांति और विकास की नींव साबित हो रही है। अबूझमाड़ से निकल रही यह सफलता की किरणें बता रही हैं कि इच्छाशक्ति और सहयोग से अंधेरे में भी उजाला फैलाया जा सकता है।




