हिंदी पत्रकारिता और साहित्य में उत्कृष्ट योगदान के लिए अभिषेक बेनर्जी होंगे डॉक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित

विश्व हिंदी दिवस पर नई दिल्ली में आयोजित समारोह में मिलेगा सम्मान

नारायणपुर, ब्यूरो।
हिंदी भाषा में उत्कृष्ट पत्रकारिता और साहित्य सृजन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले नारायणपुर जिले के युवा पत्रकार व लेखक अभिषेक बेनर्जी को पंडित दीनदयाल उपाध्याय हिंदी विद्यापीठ, वृंदावन धाम मथुरा द्वारा डॉक्टरेट की मानद उपाधि (विद्यावाचस्पति) से सम्मानित किया जाएगा।
यह प्रतिष्ठित सम्मान उन्हें 27 जुलाई को विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर नई दिल्ली में आयोजित एक भव्य समारोह में प्रदान किया जाएगा। पंडित दीनदयाल उपाध्याय हिंदी विद्यापीठ देश की उन प्रमुख संस्थाओं में से है, जो हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार तथा सांस्कृतिक मूल्यों को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
निष्पक्ष पत्रकारिता व साहित्यिक अभिव्यक्ति का सम्मान
विद्यापीठ के कुलपति डॉ. इंदुभूषण मिश्रा ‘देवेंदु’ द्वारा जारी पत्र में यह जानकारी दी गई है कि श्री बेनर्जी को यह उपाधि हिंदी भाषा की सेवा, पत्रकारिता की निष्पक्षता और साहित्यिक अभिव्यक्ति को नई ऊंचाइयों तक पहुँचाने हेतु दी जा रही है।
अभिषेक बेनर्जी ने पिछले वर्षों में हिंदी भाषा में पत्रकारिता के माध्यम से सामाजिक सरोकारों को मुखर स्वर दिया है और समकालीन विषयों पर रचनात्मक लेखन से साहित्यिक क्षेत्र में विशेष पहचान बनाई है।
बस्तर से बधाईयों का तांता
बेनर्जी को डॉक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित होने पर क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों और शुभचिंतकों ने उन्हें हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं।
मंत्री केदार कश्यप, बस्तर सांसद महेश कश्यप, प्रदेश व जिला स्तरीय वरिष्ठ पत्रकारों, साहित्यकारों, जनप्रतिनिधियों एवं समाजसेवियों ने इस उपलब्धि को नारायणपुर और बस्तर क्षेत्र के लिए गौरव की बात बताया है।
हिंदी के प्रचार-प्रसार में विद्यापीठ की भूमिका
गौरतलब है कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय हिंदी विद्यापीठ न केवल देश में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हिंदी भाषा को बढ़ावा देने वाली प्रमुख संस्थाओं में गिनी जाती है। यह संस्था प्रत्येक वर्ष विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर हिंदी सेवियों को सम्मानित करती है और हिंदी को वैश्विक भाषा के रूप में स्थापित करने हेतु विविध प्रयास करती है।
इस अवसर पर बेनर्जी ने कहा कि, “यह सम्मान मेरे लिए नहीं, बल्कि उन सभी पत्रकारों और लेखकों के लिए है जो हिंदी भाषा की गरिमा को बचाए रखने के लिए निरंतर कार्यरत हैं। मैं इस सम्मान को अपने जिले और बस्तर की माटी को समर्पित करता हूं।”
इस खबर के माध्यम से नारायणपुर जिले के युवाओं को यह संदेश भी जाता है कि साहित्य और पत्रकारिता जैसे क्षेत्रों में निरंतर प्रयास और निष्ठा से कार्य किया जाए, तो पहचान और सम्मान निश्चित है।




