आईटीबीपी जवानों ने पौधा रोपण कर आमजन को किया जागरूक

आईटीबीपी जवानों ने पौधा रोपण कर आमजन को किया जागरूक
आमदई कैम्प और स्कूल परिसर में किया पौधारोपण, पर्यावरण संरक्षण की अपील
नारायणपुर / छोटेडोंगर, 24 जुलाई 2025।
देशभर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल “एक पेड़, मां के नाम” के तहत पौधारोपण अभियान जारी है, जिसका असर अब शहरी से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में भी देखा जा रहा है। इसी कड़ी में आईटीबीपी 38वीं वाहिनी के जवानों ने शुक्रवार को नारायणपुर जिले के छोटेडोंगर क्षेत्र स्थित मुण्डाटिकरा गांव में एक वृहद पौधारोपण अभियान आयोजित किया।

आईटीबीपी का पर्यावरण संरक्षण में योगदान
आईटीबीपी के जवानों ने आमदई कैम्प और मुण्डाटिकरा उच्च प्राथमिक शाला परिसर में मिलकर कुल 395 पौधे लगाए, जिनमें 275 फलदार और उपयोगी पौधे शामिल थे। यह अभियान भारतीय तिब्बत सीमा पुलिस के जवानों द्वारा नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में नक्सल उन्मूलन अभियान के तहत किए जा रहे कार्यों का हिस्सा था, जिसमें सुरक्षा के साथ-साथ सामाजिक और पर्यावरणीय जिम्मेदारियों का निर्वहन किया जा रहा है।

आईटीबीपी जवानों का प्रयास
आईटीबीपी के सेनानी रोशन सिंह असवाल के नेतृत्व में जवानों ने स्कूल परिसर में बच्चों और गांव के ग्रामीणों को पर्यावरण संरक्षण के बारे में जागरूक किया। उन्होंने इस अवसर पर बच्चों से संवाद स्थापित करते हुए सरकार की विकास योजनाओं, उच्च शिक्षा और रोजगार के अवसरों के बारे में जानकारी दी।
स्थानीय नेताओं की सहभागिता
पौधारोपण अभियान में भा.ज.पा. जिला अध्यक्ष संध्या पवार ने बच्चों और ग्रामीणों से अपील करते हुए कहा, “पर्यावरण के संतुलन के लिए पौधारोपण अत्यंत आवश्यक है। पेड़-पौधे हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं।” वहीं, छोटेडोंगर के उपसरपंच संतोष बैठारू ने भी इस अभियान को समर्थन देते हुए ग्रामीणों और बच्चों को पौधारोपण के महत्व को समझाया।
पौधारोपण से जुड़ी अन्य जानकारी
इस कार्यक्रम में स्कूल के शिक्षक, बच्चे, जनप्रतिनिधि और ग्रामीणों ने उत्साह से भाग लिया और पौधारोपण किया। साथ ही, साहायक सेनानी संजीव कुमार परोचे, थाना प्रभारी सुदर्शन सिंह ध्रुव और पंचगण भी इस अवसर पर उपस्थित थे।
इस अभियान का उद्देश्य न सिर्फ पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना था, बल्कि समाज में जिम्मेदार नागरिकता की भावना भी विकसित करना था। यह पहल न केवल क्षेत्रीय विकास को गति दे रही है, बल्कि लोगों को पर्यावरण के प्रति संवेदनशील भी बना रही है।




