महिला महाविद्यालय में डॉ. अंबेडकर के बौद्धिक चिंतन पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन

महिला महाविद्यालय में डॉ. अंबेडकर के बौद्धिक चिंतन पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन…
नारायणपुर: 12 अप्रैल 2025 शनिवार को
महिला महाविद्यालय में शनिवार को संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर के बौद्धिक एवं सामाजिक चिंतन पर आधारित एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जिले के प्रबुद्ध जनों, समाजसेवियों और शिक्षकों ने भाग लिया तथा डॉ. अंबेडकर के विचारों एवं संघर्षों पर विस्तार से चर्चा की।
संगोष्ठी में विशिष्ट अतिथि के रूप में ऊर्जावान सामाजिक कार्यकर्ता मोरध्वज दास मानिकपुरी, वरिष्ठ उद्घोषक नारायण साहू, सामाजिक कार्यकर्ता नवीन जैन तथा जिले के 14 समाज प्रमुखों ने डॉ. अंबेडकर के जीवन संघर्षों और सामाजिक योगदानों पर प्रकाश डाला।
मुख्य अतिथि प्रो. डॉ. संजीव वशिष्ठ ने कहा कि “डॉ. अंबेडकर दूरदर्शी, प्रखर और राष्ट्रप्रेमी व्यक्तित्व थे। उन्होंने महिलाओं के अधिकारों को संविधान में विशेष स्थान देकर उन्हें सशक्त बनाया। आज हमें उनसे यह सीख लेनी चाहिए कि देशहित सर्वोपरि है, और संकट के समय हमें एकजुट रहना चाहिए।”
मुख्य वक्ता ऋषिकेश ठाकुर ने कहा कि डॉ. अंबेडकर का सामाजिक चिंतन समाज के अंतिम पंक्ति के व्यक्ति को केंद्र में रखकर था। उन्होंने जातिविहीन, समतामूलक समाज की कल्पना की थी और अपने जीवनभर उसके लिए संघर्ष किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ. योगेंद्र कुमार ने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे डॉ. अंबेडकर के जीवन से प्रेरणा लें और सदैव सकारात्मक सोच रखें। उन्होंने कहा, “शिक्षा शेरनी का दूध है, जो पिएगा वही दहाड़ेगा – यह डॉ. अंबेडकर की शिक्षा नीति का मूल मंत्र था।”
कार्यक्रम का मंच संचालन डंकेश्वर बर्मन ने किया। उन्होंने कहा कि डॉ. अंबेडकर सच्चे अर्थों में राष्ट्र निर्माता थे, जो जातिविहीन समाज की स्थापना करना चाहते थे।
इस अवसर पर महाविद्यालय के समस्त शिक्षकगण – डॉ. मिंटू कुमार गौतम (दलित चिंतक), किशोर कुमार कोठारी, निहारिका सोरी, डॉ. क्षमा ठाकुर, भूमिका पिस्दा, शंकर वैद्य, नितेश सोनकर, नोहर राम साहू, भूषण जय गोयल, दुलेश्वरी कंडरा समेत सभी सहायक प्राध्यापक उपस्थित रहे।
संगोष्ठी में भाग लेने वाले छात्र-छात्राओं ने डॉ. अंबेडकर के जीवन दर्शन से प्रेरणा लेते हुए समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों को निभाने का संकल्प लिया।




