प्रशासनिक लापरवाही से बस्तर पण्डुम कार्यक्रम हुआ असफल, ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों में गहरी नाराजगी

प्रशासनिक लापरवाही से बस्तर पण्डुम कार्यक्रम हुआ असफल, ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों में गहरी नाराजगी…
नारायणपुर, 17 March 2025: जिले के अबूझमाड़ के कोहकामेटा में आयोजित बस्तर पण्डुम कार्यक्रम प्रशासनिक लापरवाही के कारण पूरी तरह से असफल हो गया। कार्यक्रम की जानकारी समय पर न मिलने और व्यवस्थाओं की कमी के चलते आयोजनों का उद्देश्य पूरा नहीं हो सका, जिससे जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों में गहरी नाराजगी देखने को मिली।

कार्यक्रम की शुरुआत सोमवार को सुबह 10 बजे होनी थी, लेकिन सूचना में देरी और तैयारियों की कमी के कारण कार्यक्रम घंटों देरी से शुरू हुआ। पहले से निर्धारित समय पर पहुंचे जिला पंचायत उपाध्यक्ष प्रताप मंडावी, जनपद उपाध्यक्ष मांगडू नूरेटी और सामाजिक कार्यकर्ता नरेंद्र मेश्राम को कार्यक्रम के शुरू होने तक घंटों इंतजार करना पड़ा, जिसके बाद उन्हें वापस लौटना पड़ा। वहीं, जिला पंचायत अध्यक्ष नारायण मरकाम, जनपद पंचायत अध्यक्ष नरेश कोर्राम और अन्य जनप्रतिनिधि 3 बजे के आसपास कार्यक्रम में शामिल हुए।

कार्यक्रम की शुरुआत भी लापरवाही से हुई, जब बिना पूजा अर्चना के अतिथियों का स्वागत कर दिया गया। मीडिया कर्मियों की आपत्ति के बाद, गांव के गायता, सिरहा और गुनिया ने देवता की पूजा अर्चना की, तब कहीं जाकर कार्यक्रम की शुरुआत की गई। यह स्थिति प्रशासन की तैयारियों की कमी को साफ तौर पर दर्शाती है।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आदिवासी संस्कृति, कला, वाद्य यंत्र, खानपान और पारंपरिक रीति-रिवाजों को संरक्षित करना था, लेकिन ग्रामीणों और कलाकारों को कार्यक्रम की जानकारी अचानक और बिना पर्याप्त समय के दी गई, जिससे वे तैयार होकर कार्यक्रम स्थल पर पहुंच पाए, लेकिन प्रशासन की लापरवाही के कारण आयोजन में कोई प्रभावी प्रदर्शन नहीं हो सका।
जिला पंचायत अध्यक्ष नारायण मरकाम ने कहा कि शासन की महत्वपूर्ण योजनाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी, जबकि जनपद पंचायत सीईओ लोकेश्वर चतुर्वेदी ने पंचायत सचिव की हड़ताल को दोषी ठहराते हुए अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया।
ग्रामीणों और कलाकारों ने भी प्रशासन की लापरवाही को लेकर नाराजगी जताई, और कहा कि उन्हें बिना किसी पूर्व सूचना के कार्यक्रम में भाग लेने के लिए बुलाया गया। इस घटनाक्रम ने प्रशासन की कार्यशैली और योजना के संचालन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, और प्रशासनिक व्यवस्थाओं में सुधार की आवश्यकता को उजागर किया है।




