नारायणपुर

आस्था एवं उल्लास के साथ शुरू हुआ माता मावली मेला

आस्था एवं उल्लास के साथ शुरू हुआ माता मावली मेला…

मेले में भव्यता के साथ हुआ देव परिक्रमा एवं समागम…

ग्रामीणों द्वारा परंपरागत तरीके से किया गया देव विग्रहों की अगवानी…

नारायणपुर, 19 फरवरी 2025:
जिले की लोक संस्कृति, देव मान्यता एवं परंपरा का प्रतीक मावली मेला आज पूरी श्रद्धा, आस्था और उल्लास के साथ मुख्यालय में प्रारंभ हुआ। इस ऐतिहासिक अवसर पर, मेले की विधिवत शुरुआत माता मावली मंदिर में पारंपरिक पूजा-अर्चना के साथ हुई। पारंपरिक पूजा के तहत आस-पास के ग्रामों के स्थानीय देवी-देवताओं का समागम हुआ और इसके साथ ही जुलूस के रूप में मेला स्थल तक ढाई परिक्रमा की रस्म भी पूरी की गई। इस दौरान, ग्रामीणों ने देवी-देवताओं के विग्रहों का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया, जिसमें डंगई, लाठ, डोली, छत्र आदि के साथ पूजा अर्चना की गई।

मेला स्थल पर माता मावली, कोट गुड़ीन, शीतला माता, कोकोड़ी करीन, तेलवाड़ीन माता, कंकालीन माता, सोनकुंवर, भीमादेव सहित अन्य स्थानीय देवी-देवताओं की उपस्थिति ने उपस्थित जनमानस को श्रद्धा और आस्था से भाव-विभोर कर दिया। उनके साथ सिरहा पुजारी और गायता भी मौजूद थे, जिन्होंने धार्मिक अनुष्ठानों की गरिमा को बढ़ाया।

इस मेले का आयोजन 19 से 23 फरवरी 2025 तक किया जा रहा है, जिसमें प्रतिदिन सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाएगा। 19 फरवरी को स्थानीय लोक नृत्य दलों की प्रस्तुति होगी, जबकि 20 फरवरी को बस्तर संस्कृति ग्रुप की ओर से लोक रंग कार्यक्रम होगा। 21 फरवरी को अनुराग शर्मा स्टार नाइट एंण्ड ग्रुप की प्रस्तुति होगी, 22 फरवरी को रास परब एंण्ड ग्रुप की ओर से प्रस्तुति होगी और 23 फरवरी को मल्खंभ डांस एकेडमी की प्रस्तुति के साथ नितिन दुबे सुपर स्टार नाइट का आयोजन होगा।

मावली मेला इस क्षेत्र का सबसे बड़ा लोक उत्सव है, और इस बार भी इसकी रौनक को और बढ़ाने के लिए मीना बाजार, विभिन्न प्रकार के झूले, दैनिक उपयोगी वस्तुएं, फैन्सी दुकानों और मिष्ठान दुकानों से मेला स्थल सज चुका है। इस बार मेले में उमड़ रही भारी भीड़ दर्शाती है कि स्थानीय लोग इस आयोजन को लेकर कितने उत्साहित हैं।

इस आयोजन को सफल बनाने के लिए जिला प्रशासन द्वारा मेला स्थल पर पार्किंग, पेयजल, विद्युत, और सुरक्षा सहित सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं, ताकि श्रद्धालुओं और पर्यटकों को कोई असुविधा न हो।

मावली मेला न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह क्षेत्रीय संस्कृति और परंपराओं को संजोने का भी एक महत्वपूर्ण अवसर बन गया है।

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