महिला महाविद्यालय नारायणपुर द्वारा सात दिवसीय विशेष शिविर का शुभारंभ ग्राम बागडोंगरी में

नारायणपुर। वीरांगना रमोतिन माडिया शासकीय आदर्श महिला महाविद्यालय नारायणपुर की राष्ट्रीय सेवा योजना (रा.से.यो.) इकाई द्वारा ग्राम बागडोंगरी, जिला नारायणपुर में 15 नवम्बर 2024 से 21 नवम्बर 2024 तक सात दिवसीय विशेष शिविर का आयोजन किया गया है। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य स्वच्छता और जागरूकता फैलाना है, जिसका थीम ‘स्वच्छता ही सेवा’ रखा गया है।

कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि सामाजिक कार्यकर्ता श्री नरेन्द्र मेश्राम, जन भागीदारी अध्यक्ष, शासकीय स्वामी आत्मानंद स्नातकोत्तर महाविद्यालय नारायणपुर के हाथों हुआ। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में ग्राम सरपंच परमेश्वर कुमार उइके, डॉ. एस.आर. कुंजाम, प्राचार्य शा. स्वामी आत्मानंद महाविद्यालय नारायणपुर, और कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. योगेन्द्र कुमार, प्राचार्य वी.र.मा.शा.म. महिला महाविद्यालय नारायणपुर ने की। कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में श्री बी.डी. चांडक, जिला संयोजक, राष्ट्रीय सेवा योजना, जिला नारायणपुर भी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत छत्तीसगढ़ महतारी और स्वामी विवेकानंद जी के छायाचित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ की गई। रा.से.यो. की स्वयं सेविकाओं द्वारा ‘लक्ष्य गीत’ का गायन किया गया। मुख्य अतिथि श्री नरेंद्र मेश्राम ने अपने संबोधन में हर संभव मदद का आश्वासन दिया और विवेकानंद जी के विचारों से प्रेरणा लेने की बात कही। विशिष्ट अतिथि डॉ. एस.आर. कुंजाम ने रा.से.यो. के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला और छात्राओं को स्वच्छता व जागरूकता कार्य हेतु प्रेरित किया।
कार्यक्रम के अध्यक्ष डॉ. योगेन्द्र कुमार ने छात्राओं में नई ऊर्जा का संचार किया और उन्हें अपने कार्यों में उत्कृष्टता की ओर प्रेरित किया। जिला संयोजक श्री बी.डी. चांडक ने स्वामी विवेकानंद जी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए छात्राओं को उनके आदर्शों को अपनाने की प्रेरणा दी।
कार्यक्रम का संचालन कु. मोनिका नेताम ने किया। शिविर का संचालन राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम अधिकारी सुश्री निहारिका सोरी के निर्देशन में और जिला संयोजक श्री चांडक के मार्गदर्शन में हुआ। इस आयोजन में संस्था के सहायक प्राध्यापक श्री भुषण जय गोयल, श्री किशोर कुमार कोठारी, श्री अरूण कुमार शुक्ल, सुश्री मोनिका गंधर्व, भूमिका पिस्दा, श्री नितेश सोनकर तथा ग्राम के पंच और ग्रामीणों का विशेष योगदान रहा।




